Bcom 2nd year overhead notes

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Bcom 2nd year overhead notes

उपरिव्यय (Overheads) 

प्रश्न 1. उपरिव्यय से क्या अभिप्राय है ? इनका वर्गीकरण किस प्रकार किया जा सकता है? उदाहरण सहित समझाइये। What is meant by overheads ? How can these be classified ? Explain with examples. (Bcom 2nd year overhead notes)

अधिव्यय से आप क्या समझते हैं ? अधिव्ययों के वर्गीकरण को समझाइये और उनके बँटवारे की विभिन्न विधियों को बताइये। What do you mean by overheads ? Explain the classification of overheads and point out the different methods of their allocation. 

उपरिव्यय या अधिव्यय का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Overheads or on cost)

वे सभी व्यय जिनका उत्पादन की प्रति इकाई से प्रत्यक्षतः कोई सम्बन्ध नहीं होता किन्तु उत्पादन कार्य,बिक्री,वितरण कार्य आदि के लिये अनिवार्य हैं उपरिव्यय कहलाते हैं। दूसरे शब्दों में,अप्रत्यक्ष मजदूरी,अप्रत्यक्ष सामग्री तथा अप्रत्यक्ष व्ययों का कुल योग उपरिव्यय कहलाता है। सामान्य अर्थ में, अप्रत्यक्ष व्यय और उपरिव्यय को एक-दूसरे का पर्यायवाची माना जाता है। लेकिन अप्रत्यक्ष व्यय तो वास्तविक होते हैं व इनका लेखा वित्तीय पुस्तकों में किया जाता है. जबकि लागत पुस्तकों में अप्रत्यक्ष व्ययों का लेखा किया जाता है । अतः अनुमानित अप्रत्यक्ष व्ययों को ही उपरिव्यय या अधिव्यय कहा जाता है। 

वाल्टर डब्ल्यू. बिग (Walter W. Bigg) के शब्दों में, “उपरिव्यय या अधिव्यय का अभिप्राय उत्पादन पर किए गए उस प्रभार से है जो अप्रत्यक्ष व्ययों को वसूली के लिए किया गया हो।” 

लागत लेखों में उत्पादन की प्रति इकाई लागत या प्रत्येक कार्य या ठेके या विधि की लागत ज्ञात करने के लिए अप्रत्यक्ष व्ययों का कुछ मान्य सिद्धान्तों के आधार पर अनुमान लगाया जाता है । अनुमानित अप्रत्यक्ष व्ययों को उपरिव्यय या अधिव्यय कहते हैं । अनुमानित होने के कारण ही लागत पुस्तकों में उपरिव्यय अधिक या कम वसूल हो जाते हैं (Overheads Over recovered Or Under-recovered in Cost Books) जिनका समाधान बाद में लागत समाधान विवरण (Cost Reconciliation Statement) तैयार करके किया जाता है । संक्षेप में लागत पुस्तक में मूल लागत (Prime Cost) के अतिरिक्त जितने भी व्यय सम्मिलित किए जाते हैं, वे सभी उपरिव्यय या अधिव्यय कहलाते हैं। 

उपरिव्ययों का वर्गीकरण

(Classification of Overheads)

उपरिव्ययों का वर्गीकरण अग्र प्रकार से किया जा सकता है –

(I) कार्यों के अनुसार वर्गीकरण ।

(II) तत्वों के अनुसार वर्गीकरण ।

(III) व्ययों के आचरण के अनुसार वर्गीकरण अथवा परिवर्तनशीलतानुसार वर्गीकरण ।

(IV) नियन्त्रण के अनुसार वर्गीकरण ।

(V) समायान्तर के अनुसार वर्गीकरण । 

(i) क्रियानुसार वर्गीकरण (Function-wise Classification)

सामान्यतः किसी भी संस्था की प्रमुख क्रियाओं में उत्पादन, प्रशासन,विक्रय एवं वितरण को 

शामिल किया जाता है। अत: उपरिव्ययों को इन क्रियाओं के अनुसार वर्गीकृत करना ही क्रियानुसार वर्गीकरण कहलाता है । इस दृष्टि से उपरिव्ययों को निम्न चार भागों में बाँटा जा सकता 

(i) कारखाना उपरिव्यय (Factory overhead)-जिसे Works overhead, Production overhead या Manufacturing overhead भी कहते हैं । 

(ii) कार्यालय एवं प्रशासन उपरिव्यय (Office and Administration ovelhead)-जिसे Establishment या General overhead भी कहते हैं। 

(iii) विक्रय उपरिव्यय (Selling overhead)

(iv) वितरण उपरिव्यय (Distribution overhead)। 

उपरिव्ययों का यह वर्गीकरण अत्यन्त लोकप्रिय है और प्रत्येक कारखाने में निर्मित वस्तु की विभिन्न स्तरों पर लागत ज्ञात करने में इनका उपयोग किया जाता है।

(II) तत्वों के अनुसार वर्गीकरण (Element wise Classification) 

उपरिव्यय की परिभाषा के अनुसार ही इस वर्गीकरण का उदय होता है। इस वर्गीकरण के अनुसार उपरिव्ययों को निम्नलिखित तीन भागों में बाँटा जा सकता है –

(1) अप्रत्यक्ष सामग्री व्यय (Indirect Material Expenses)-

अप्रत्या में ऐसे व्यय होते हैं जो कारखाने की मशीनों से सम्बन्धित होते हैं। इन व्ययों में मर लिए प्रयुक्त स्टोर की सामग्री का व्यय मशीन को छोटे-मोटे औजारों का व्यय,चिकन ईधन व्यय, आम प्रयोग के लिए औजार आदि के व्यय प्रमुख हैं। 

(2) अप्रत्यक्ष श्रम व्यय (Indirect Labour Expensest-

अप्रत्यक्ष श्रम आते हैं-अवकाश एवं लंच समय का वेतन, अप्रत्यक्ष श्रम का पारिश्रमिक,श्रमिक का बीमा फण्ड में अंशदान, अधिसमय का पारिश्रमिक तथा मरम्मत एवं अनुरक्षण श्रम का ५१ आदि । 

(3) अप्रत्यक्ष व्यय (Indirect Expenses)-

इसके अन्तर्गत शे| वे सभी व्यय जातह जो कार्य के अनुसार वर्गीकरण में दिए गए हैं।

(III) व्ययों के आचरण के अनुसार वर्गीकरण अथवा परिवर्तनशीलतानुसार वर्गीकरण (Classification according to Behavioural Expenditure or variabilitywise classification) , 

उपरिव्ययों से सम्बन्धित विभिन्न व्यय भिन्न-भिन्न प्रकृति के होते हैं। कछ व्यय स्थिर, कुछ व्यय परिवर्तनशील तथा कुछ व्यय अर्द्धपरिवर्तनशील प्रकृति के होते हैं। कुछ व्यय उत्पादन की मात्रा घटने के साथ कम हो जाते हैं तथा उत्पादन की मात्रा बढ़ने के साथ बढ़ जाते हैं। जबकि कुछ व्ययों का उत्पादन की मात्रा से कोई सम्बन्ध नहीं होता ये व्यय स्थिर प्रकृति के होते हैं । इस प्रकार परिवर्तनशीलता के आधार पर उपरिव्ययों का विभाजन इस प्रकार किया जा सकता है ।

(1) स्थायी उपरिव्यय (Fixed Overheads) इस प्रकार के अप्रत्यक्ष व्यय वे होते हैं जो उत्पादन की मात्रा पर निर्भर न रहकर समय से सम्बन्धित होते हैं। इन व्ययों में कारखाना, कार्यालय एवं गोदाम का किराया आदि प्रमुख हैं क्योंकि ये व्यय न तो उत्पादन से सम्बन्धित होते हैं और न ही उत्पादन की मात्रा से सम्बन्धित होते हैं। 

(2) परिवर्तनशीलता उपरिव्यय (Variable Overheads)- इस प्रकार के व्ययों में बदलने का गुण होता है । वे उपरिव्यय,जो प्रत्यक्ष रूप से उत्पादन की मात्रा के साथ घटने-बढ़ने की प्रवृत्ति रखते हैं, परिवर्तनशील उपरिव्यय कहलाते हैं। इसमें प्रत्यक्ष श्रम,प्रत्यक्ष मजदूरी तथा अन्य प्रत्यक्ष व्यय आते हैं । ऐसे व्ययों में उत्पादन की वृद्धि अथवा कमी के साथ-साथ आनुपातिक रूप में वृद्धि या कमी होती है। Bcom 2nd year overhead notes

(3) अद्ध-परिवर्तनशील उपरिव्यय (Semi-variable overheads) जब व्यय न तो पूर्णतः स्थाई प्रकृति के होते हैं और न ही पूर्णतः परिवर्तनशील प्रकृति के होते हैं,अर्द्धपरिवर्तनशील या अर्द्ध-स्थाई उपरिव्यय कहलाते हैं । उदाहरण के लिये मोटर रखने के व्ययों में बीमा,सड़क कर, ड्राइवर का स्थाई वेतन स्थाई हैं, किन्तु पैट्रोल,मरम्मत, हास आदि व्यय परिवर्तनशील हैं । अतः मोटर रखने का कुल व्यय अर्द्ध-परिवर्तनशील या अर्द्ध-स्थाई कहलायेगा।

(iV) नियंत्रण के अनुसार वर्गीकरण (Classification According to Controllability)

इस आधार पर उपरिव्ययों को दो भागों में बाँटा जा सकता है 

(1) नियन्त्रणीय उपरिव्यय (Controllable overheads)-वे व्यय जो. सगठन प्रबन्धकों व अधिकारियों के निर्णय से प्रभावित हो सकते हैं अर्थात जिनका नियंत्रण किया जा सकता है नियन्त्रणीय उपरिव्यय कहलाते हैं। 

(2) अनियन्त्रणीय उपरिव्यय (Uncontrollable overheads)-वे व्यय जो संगठन के प्रबन्धकों की नियंत्रण शक्ति से बाहर हैं और जिनका निर्धारण संगठन के बाह्य तत्वों द्वारा किया जाता है,अनियन्त्रणीय उपरिव्यय कहलाते हैं।

(v) समयानुसार वर्गीकरण (Normalcywise classification) – सामान्यतः इनको भी दो आधारों पर विभाजित किया जा सकता है 

(1) सामान्य उपरिव्यय (Normal overheads) सामान्य दशाओं में सामान्य उत्पादन पर होने वाले व्ययों को सामान्य उपरिव्यय कहा जाता है । इन व्ययों को वस्तु की उत्पादन लागत में शामिल किया जाता है।

(2) असामान्य उपरिव्यय (Abnormal overheads)-ऐसे व्यय जो विशेष परिस्थिति या असाधारण हानि के कारण बढ़ जाते हैं असामान्य उपरिव्यय कहलाते हैं । इस प्रकार से बढ़े हुए असाधारण व्ययों को उत्पादित वस्तु की उत्पादन लागत में ना जोड़कर लाभ-हानि खाते में ले जाना चाहिए। 

लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. ‘अतिअवशोषणतथान्यूनअवशोषणशब्दों की व्याख्या कीजिये। Explain the terms-over-absorption’ and ‘under absorption’.

उपरिव्यय का अल्प या अति अवशोषण (Under or Over Absorption of Overhead) –

उपरिव्ययों को उत्पादन की विभिन्न इकाइयों अथवा कार्यों पर अनुमानित आधार पर विभाजित किया जाता है । अत: वास्तविक अप्रत्यक्ष व्ययों तथा विभाजित उपरिव्ययों में अन्तर हो संकता है । अनुमानित आधार पर अवशोषित किये गये उपरिव्यय यदि वास्तविक अप्रत्यक्ष व्ययों से कम हैं तो इसे उपरिव्ययों का अल्प अवशोषण (Under absorption of overhead) और यदि अधिक होता है तो इसे उपरिव्ययों का अति अवशोषण (Over absorption of overhead) कहते हैं । उपरिव्ययों का वास्तविक अप्रत्यक्ष व्ययों से कम या अधिक होने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं

(i) यदि वास्तविक उत्पादन अनुमानित उत्पादन से कम या अधिक हुआ है। उदाहरणार्थ यदि उपरिव्ययों का अवशोषण 10000 इकाईयों के आधार पर हुआ है और वास्तविक उत्पादन 10,000 इकाइयाँ हैं, तो वास्तविक अप्रत्यक्ष व्ययों तथा अवशोषित उपरिव्ययों में अन्तर स्वाभाविक है। 

(ii) यदि उपरिव्ययों का वितरण सामग्री या श्रम के आधार पर किया गया हो और उनकी लागत में अनुमान से अधिक परिवर्तन हो जाये।  

(iii) उपरिव्ययों का आधार श्रम लागत हो और वास्तव में श्रमिकों के स्थान पर मशीनों का अधिक प्रयोग किया गया हो। 

(iv) उपरिव्ययों का एकत्रीकरण,विभाजन या अवशोषण का आधार ही गलत हो । 

उपरोक्त कारणों से वास्तविक अप्रत्यक्ष व्ययों तथा उपरिव्ययों में अन्तर होता है जिस समाधान विवरण पत्र (Reconciliation statement) बनाया जाता है,ताकि अति-अव को स्पष्टतः जाना जा सके। 

प्रश्न 2. प्रशासनिक उपरिव्ययों के अवशोषण की गणना विधि में प्रयोग किये जाने वाले विभिन्न सूत्र बताइये। 

Explain the different formula which are helpful in calcualtion of Absorption of administration overheads. 

प्रशासनिक उपरिव्ययों का अवशोषण (Absorption of administration overheads) .

प्रशासनिक उपरिव्यय उद्योग की नीति-संचालन एवं व्यवस्था से सम्बन्ध रखते हों कार्यालय कर्मचारियों का वेतन, डाक व्यय,स्टेशनरी,टेलीफोन किराया. आदि व्यय इस श्रेणी में आते है। जब इन व्ययों को लागत की एक पृथक मद के रूप में किसी वस्तु या उपकार्य की लागत में शामिल किया जाना हो तो इनके अवशोषण हेतु समुचित आधार का चयन करना आवश्यक होता है । सामान्यतः सम्पूर्ण कारखाने के लिए एक ही अवशोषण दर ज्ञात कर लेते हैं । विभिन्न विभागों द्वारा किये गये व्ययों के सम्बन्ध में विस्तृत विवरण पर ध्यान नहीं दिया जाता है संक्षेप में प्रशासनिक उपरिव्ययों के अवशोषण दर की गणना निम्न आधारों पर की जा सकती है 


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