Causes of Slow Growth in National Income in India

Causes of Slow Growth in National Income in India

राष्ट्रीय आय में धीमी गति से वृद्धि के कारण

भारत में योजनाकाल में राष्ट्रीय आय एवं प्रति व्यक्ति आय में लगातार वृद्धि होती दिखाई दे रही है,किन्तु स्थिर कीमतों के आधार पर देखें तो यह वृद्धि सन्तोषजनक नहीं कही जा सकती। विश्व के अन्य देशों की तुलना में भारत की राष्ट्रीय आय एवं प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि दर बहुत कम है योजनाकाल में भारत की राष्ट्रीय आय में धीमी गति से वृद्धि के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

1. कृषि का प्राकृतिक घटकों पर आश्रित होना- भारत की राष्ट्रीय आय की वृद्धि में कृषि क्षेत्र का महत्त्वपूर्ण योगदान है, किन्तु भारतीय कृषि मानसून पर निर्भर करती है। मानसून अनुकूलन रहने पर कृषि उत्पादन बढ़ने से राष्ट्रीय आय बढ़ जाती है और मानसून के प्रतिकूल रहने पर कृषि उत्पादन घटने से राष्ट्रीय आय घट जाती है। यद्यपि कृषि की मानसून पर निर्भरता को कम करने के लिए योजनाकाल में सिंचाई के साधनों का विकास किया गया है, किन्तु ऐसा कुल कृषि क्षेत्र के केवल 1/3 भाग पर ही हो सका है। शेष क्षेत्र वर्षा पर ही आश्रित है। इससे राष्ट्रीय आय में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। W

2. जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि – भारत में प्रति व्यक्ति आय की धीमी वृद्धि का एक प्रमुख कारण जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि भी रहा है। भारत में जिस दर से जनसंख्या बढ़ रही है, वह सारे बढ़े हुए उत्पादन के लाभों को हजम कर जाती है और उत्पादन व राष्ट्रीय आय बढ़ने के बावजूद प्रति व्यक्ति आय में पर्याप्त वृद्धि नहीं हो पाती है।

3. अर्थव्यवस्था में मुद्रा प्रसार – भारतीय अर्थव्यवस्था मुद्रा प्रसार एवं आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में भारी वृद्धि से पीड़ित रही है। राष्ट्रीय आय के अनुमानों को देखने से स्पष्ट हो जाता है कि चालू मूल्यों पर राष्ट्रीय आय में भारी वृद्धि हो रही है, किन्तु स्थिर कीमतों पर यह वृद्धि बहुत कम है जो कि स्पष्ट रूप से मुद्रा स्फीति की स्थिति की सूचक है। मूल्य वृद्धि के कारण राष्ट्रीय आय में वास्तविक वृद्धि बहुत कम है। मुद्रा स्फीति माँग और पूर्ति पक्ष दोनों को विपरीत रूप से प्रभावित करती है।

4. औद्योगिक क्षेत्र में विकास की मन्द गति – यद्यपि योजनाकाल में देश में औद्योगीकरण को गति मिली है, किन्तु औद्योगिक क्षेत्र में विकास की गति मन्द है। कुछ उद्योग तो केवल कृषि से सम्बन्धित कच्चे माल की पूर्ति पर ही आश्रित हैं; जैसे— सूती वस्त्र, चीनी, जूट, वनस्पति तेल उद्योग आदि। इन उद्योगों का विकास कच्चे माल की पूर्ति पर निर्भर है। कच्चे माल की कमी के अतिरिक्त शक्ति के साधनों का अभाव, यातायात सुविधाओं का अभाव, वित्त की कमी, प्रबन्ध श्रम सम्बन्ध आदि भी औद्योगिक विकास में बाधक रहे हैं। औद्योगिक विकास की मन्द गति के इन कारणों द्वारा भी राष्ट्रीय आय में धीमी गति से वृद्धि हो रही है।

5. कृषि उत्पादकता में वृद्धि की गति में कमी- भारत में कृषि क्षेत्र में उत्पादन अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है। यद्यपि अब आधुनिक वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग कर कृषि क्षेत्र मे उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, तथापि कृषि उत्पादकता में वृद्धि की गति अभी भी अत्यन्त धीमी होने के कारण राष्ट्रीय आय में अपेक्षित गति से वृद्धि नहीं हो पा रही है।

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