Bsc 1st year UV spectroscopy long question answer

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Bsc 1st year UV spectroscopy long question answer


प्रश्न 2- Uv-स्पैक्ट्रोस्कोपी किसे कहते हैं? निम्नलिखित की व्याख्या करें

What is UV spectroscopy? Explain following

(a) इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण (Spectroscopic transition)

(b) वर्णस्थानान्तरण (Spectroscopic Shifts

उत्तर-

UV- स्पैक्ट्रोस्कोपी-

जब कार्बनिक यौगिक जोकि बहुबन्ध युक्त है, में पराबैंगनी क्षेत्र (200-400 nm) के विकिरण को प्रवाहित करते हैं तो आपतित विकिरण का कुछ भाग यौगिक द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है। अवशोषित होने वाले विकिरण की मात्रा, यौगिक्र की संरचना तथा विकिरण की तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करती है। अवशोषित विकिरण की ऊर्जा मुख्यतः इलेक्ट्रॉनों को निम्न ऊर्जा स्तर से उच्च स्तर में उत्तेजित करती है जिससे इलेक्ट्रॉनों का संक्रमण होता है। स्पेक्ट्रोफोटोमीटर की सहायता से कार्बनिक यौगिक के पराबैंगनी विकिरण का अध्ययन ही UV-स्पेक्ट्रोस्कोपी कहलाता है।

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(a) इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण (Spectroscopic transitions)

(b) वर्णस्थानान्तरण (Spectroscopic Shifts)

उत्तर-किसी यौगिक की भूल ऊर्जा का अवशोषण करने वाले समूह को क्रोमोफोर कहते हैं तथा इन क्रोमोफोर में किसी अन्य प्रतिस्थापी (वर्ण वर्द्धक) को जोड़ने पर अवशोषण बैण्ड की तीव्रता तथा स्थान में परिवर्तन हो जाता है। इसे वर्ण शिफ्ट कहते हैं।

(1) वर्णमूलक या क्रोमोफोर (Chromophores)-वर्णमूलक कोई भी विलगित सहसंयोजी बंधित समूह होते हैं, जो चयनात्मक तरंगदैर्यों का अवशोषण करते हैं और यहाँ तक कि लघु संरचनात्मक परिवर्तन भी अवशोषित विकिरण, जैसे—-एथेलिनी, एसेटिलिनी, काबॉलिनों, अम्लों, ईस्टरों, नाइट्राइल समूहों आदि में अवगम्य परिवर्तन ला देते हैं।

(2) वर्णवर्धक या वर्णधर्मी (Auxochromes)-वर्णवर्धक कोई भी वह समूह होता है जो स्वयं वर्णमूलक रूप से कार्य नहीं करता, बल्कि उसकी उपस्थिति स्पेक्ट्रम के लाल घेर की ओर अवशोषण पट्टे को स्थानांतरित कर देती है, जैसे -OH, -OR, – NH2. –NHR. -NR), -SH आदि।

वर्णपूलक कोई भी तंत्र होता है जो यौगिक को वर्ण प्रदान करने का उत्तरदायी होता है, जबकि वर्णवर्धक समूह होता है। यह अ-बंधक इलेक्ट्रॉनों की सहभाजिता (sharing) द्वारा एक वर्णमूलक का युग्मन विस्तारित करता है।

वर्णमूलक व वर्णवर्धक के कारण निम्न शिफ्ट उत्पन्न होते हैं

(a) वर्णोत्कर्षी प्रभाव– जब प्रतिस्थापी समूह के कारण अवशोषण बैण्डों का विस्थापन लम्बी तरंगदैर्ध्य की ओर हो जाये तो इसे Bathochronic shift या लाल शिफ्ट कहते हैं।

(b) वर्णोपकर्षी प्रभाव-जब प्रतिस्थापी समूह अवशोषण बैण्ड का विस्थापन छोटी तरंगदैर्ध्य की ओर कर दें तो यह वर्णोपकर्षी या नीला विस्थापन कहते हैं।


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