Business Communication Notes pdf

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Business communication Question paper 2020 pdf

Business communication Question paper 2020 pdf व्यावसायिक सम्प्रेषण (Business Communication) B.Com. (Part 1) इस प्रश्न-पत्र को पाँच खण्डों-अ, ब, स, द एवं इ में विभाजित किया गया है। खण्ड-अ (लघु उत्तरीय प्रश्न) में एक लघु उत्तरीय प्रश्न है, जिसके दस भाग हैं। ये सभी दस भाग अनिवार्य हैं। खण्डों-ब, स, द एवं इ (विस्तृत उत्तरीय … Read more

Audience Analysis

Audience Analysis श्रोता विश्लेषण श्रोताओं का समूह सम्प्रेषण का दूसरा किनारा एवं महत्त्वपूर्ण पक्ष होता है। श्रोताओं की प्रतिक्रिया, प्रतिपुष्टि अथवा प्रत्युत्तर सम्प्रेषण प्रक्रिया का महत्त्वपूर्ण घटक है। सम्प्रेषण प्रक्रिया में श्रोताओं की भूमिका निम्नांकित चित्र द्वारा प्रदर्शित की जा सकती है – व्यावसायिक सम्प्रेषण प्रक्रिया में सन्देश एवं प्रत्युत्तर क्रमश: Input तथा Output होते हैं | सन्देश एवं उनके प्रत्युत्तर द्वारा आन्तरिक एवं बाह्य दोनों पक्षों को प्रभावित / प्रेरित (Influence) कर संगठनात्मक छवि (Organisational Image) का निर्माण किया जाता है। सम्प्रेषण द्वारा सहयोगियों, वैयक्तिक, प्रबन्धकीय, संगठनात्मक एवं व्यावहारिक क्षमताओं को विकसित करने के लिए प्रेरित करना तथा साथ-साथ बाह्य पक्षों के मध्य संगठन, उत्पाद, कार्यप्रणाली की स्वच्छ छवि को निर्मित करना प्रमुख ध्येय होता है। इस लक्ष्य पूर्ति के लिए सम्प्रेषण के प्रभावों का परीक्षण एवं उनका अध्ययन ही श्रोता विश्लेषण कहा जाता है। Audience Analysis Audience group is the other side and important aspect of communication. Audience feedback is an important component of the communication process. The role of the audience in the communication process can be represented … Read more

Explain AIDA formula to write a Persuasive Letter.

Explain AIDA formula to write a Persuasive Letter. प्रेरित करने वाले पत्र के लिए AIDA सूत्र की व्याख्या कीजिए। उत्तर -जब पत्र लेखक को इस बात की आशंका होती है कि पत्र प्राप्तकर्ता आपत्ति या विरोध प्रकट करेंगे तो उसे अपनी बात पर बल देने के लिए प्रमाणों तथा आँकड़ों की आवश्यकता पड़ती है। इस विधि के अन्तर्गत प्रेरक पत्रों का नियोजन प्रसिद्ध सूत्र AIDA के आधार पर किया जाता है— इस प्रकार एक प्रेरित करने वाले पत्र के चार भाग हो सकते हैं- 1. A. ध्यान – प्रथम वाक्य खण्ड (A : Attention: First Paragraph) प्रेरक पत्रों का प्रथम भाग पाठक/श्रोता का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से लिखा जाता इसमें पाठक के हित व लाभ की बात को स्पष्ट करना चाहिए जिससे वह पत्र पढ़ने के लिए प्रेरित हो जाए। पाठकों को प्रारम्भ में ही भरोसा दिलाना होता है कि आप कुछ लाभदायक अथवा रोचक बात कहने जा रहे हैं। पाठक जानना चाहता है कि ‘मेरे लिए क्या सन्देश है?’ प्रत्येक प्रेरित करने वाले पत्र को ऐसे आरम्भ करना चाहिए ताकि पाठकों का ध्यान आकर्षित हो । प्रेरक पत्र (अ) व्यक्तिगत (ब) ‘आप’ दृष्टिकोण (You’ Attitude) प्रयोग से भरपूर (स) फिजूल बातों रहित तथा (द) प्रासंगिक (Relevant) होना चाहिए। १ एक प्रेरित करने वाले पत्र का आरम्भ निम्नलिखित ढंग से किया जा सकता है – 2. I. रुचि – दूसरा वाक्य खण्ड (I. Interest : Second Paragraph) — पत्र के द्वितीय भाग का उद्देश्य पाठक में रुचि जाग्रत करना होता है अर्थात् पत्र के इस हिस्से में ऐसे तथ्यों व संवादों का प्रयोग किया जाता है जिससे उस पत्र के प्रस्ताव के प्रति रुचि जाग्रत हो जाए। इसलिए आवश्यक है कि इस हिस्से में पाठक के विचारों की अभिव्यक्ति की जाए। अपनी बात पर बल देने के लिए तथ्य व आँकड़े दिए जाने चाहिए तथा भावनात्मक व मनोवैज्ञानिक अपील की जानी चाहिए । इस खण्ड में अपनी योजना, उत्पाद अथवा सेवा के विषय में बताने के पश्चात् यह बताना चाहिए कि पाठकों के लिए यह किस प्रकार लाभदायक है। अपने उत्पाद, योजना तथा सेवा की मुख्य विशेषताएँ, निर्माण, आकार, कार्यक्षमता, सुन्दरता, कार्य आदि को स्पष्ट करना चाहिए। इससे पाठकों को होने वाले प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभों को स्पष्ट रूप से वर्णित करना चाहिए। 3. D. इच्छा – तीसरा वाक्य खण्ड (D. … Read more

Body Contact in Business communication pdf

Body Contact in Business communication pdf शारीरिक स्पर्श (Body Contact ) In Business communication स्पर्श सम्प्रेषण का प्राथमिक स्वरूप है। शरीर के विभिन्न हिस्सों में स्पर्श विभिन्न प्रकार के सम्प्रेषण को सम्प्रेषित करते हैं, साथ ही स्पर्श क्रिया पर स्थान का भी प्रभाव पड़ता है। इसके अन्तर्गत टक्कर मारना, भिड़ जाना, धक्का देना, पकड़ना / धारण करना, थपथपाना/टहोकना, हाथ मिलाना, आलिंगन करना इत्यादि क्रियाएँ सम्मिलित हैं। इनका प्रयोग कई प्रकार के सम्बन्धों व स्थितियों को व्यक्त करता है जैसे विभिन्न व्यक्तियों का सार्वजनिक या निजी स्थानों पर स्पर्श करना, कौन व्यक्ति किसको स्पर्श कर रहा है व उनके बीच क्या सम्बन्ध है आदि बातें भी शारीरिक स्पर्श के विभिन्न पहलुओं को जन्म देती हैं। डॉक्टर व मरीज के बीच शारीरिक स्पर्श, पति-पत्नी के बीच शारीरिक स्पर्श, आशीर्वाद के रूप में दिया गया शारीरिक स्पर्श इत्यादि में शारीरिक स्पर्श के विभिन्न पहलू विद्यमान हैं। शारीरिक स्पर्श की श्रेणियाँ (Classes of Body Contact) जॉन्स व मार्वग ने शारीरिक स्पर्श क्रियाओं के विश्लेषण के आधार पर शारीरिक स्पर्श की निम्नलिखित पाँच श्रेणियाँ बताई हैं 1. नियन्त्रण – सावधान व अनुपालन । 2. सजीवता – परिहास व प्रसन्नता / जिन्दादिली । 3. अनुष्ठानिक – संस्कार, विधि या धार्मिक आवश्यकताओं के लिए; जैसे— शुभकामनाएँ व मृत्यु / प्रयाण सम्बन्धी | 4. अनुकूल प्रभाव – सम्मान, प्रशंसा, लगाव, आश्वासन, प्रशिक्षण या मौन रुचि। 5. कार्य सम्बन्धी – नियमित कार्य से सम्बन्धित; जैसे- नर्स द्वारा नब्ज का देखा जाना। इसके अतिरिक्त प्रतिकूल प्रभावी व आक्रमणशील स्पर्श भी होते हैं; … Read more

bcom 1st year business communication notes

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