Main Parts or Steps of a Report

Main Parts or Steps of a Report

किसी प्रतिवेदन के आधारभूत अंग या चरण 

प्रथम चरण (First step ) — प्रतिवेदन लिखने से पूर्व प्रतिवेदन लेखक को उसकी संरचना या ढाँचे को निर्मित करना होता है। इसे प्रतिवेदन का नियोजन कहा जाता है। एक प्रतिवेदन तैयार करते समय उसके विषय से सम्बन्धित निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए, यही प्रतिवेदन की तैयारी का प्रथम चरण है-

  • समस्या क्या है?
  • विश्लेषण क्यों आवश्यक है ?
  • इसे किसने आरम्भ किया?
  • यह स्थिति कैसे निर्मित हुई?

उपर्युक्त प्रकार के प्रश्न हमारे निरीक्षण में सहायक होते हैं। इन प्रश्नों से सम्बन्धित समस्या को परिभाषित करने में सहायता मिलती है ।

द्वितीय चरण (Second step) — दूसरे चरण के रूप में प्रतिवेदन को व्यवस्थित क्रम दिया जाता है। इस हेतु आधारभूत सिद्धान्तों का सहारा लिया जाता है। समस्या का चरणबद्ध रूप से अध्ययन किया जाता है तथा उसका उचित विभाजन किया जाता है। इस रूप में विभिन्न श्रेणियों का निर्माण हो जाता है।

तृतीय चरण (Third step ) – प्रतिवेदन तैयार करने सम्बन्धी तृतीय चरण में एक औपचारिक कार्य योजना बनाई जाती है, जिसमें निम्नलिखित बातों का समावेश किया जाता है – -(1) समस्या का विस्तृत निवारण | (2) उद्देश्य का निवारण।

चतुर्थ चरण (Fourth step) — इस चरण में समस्या से सम्बन्धित बिन्दुओं को जानने-समझने के लिए शोध का सहारा लिया जाता है। प्रतिवेदक समस्याओं से सम्बन्धित संगृहीत सूचनाओं (पुस्तक के द्वारा, जर्नल या अन्य प्रलेखों व प्रतिवेदनों के आधार पर ) का गहन अध्ययन करता है। इस प्रकरण द्वारा शोध में विस्तारपूर्वक जाया जाता है, इसके पश्चात् विभिन्न आँकड़ों का संकलन किया जाता है । यद्यपि सूचनाओं की समस्या से सम्बन्धित सूचनाओं का संग्रहण वह निम्नलिखित चार मुख्य माध्यमों द्वारा करता है –

(1) प्रयोग करके।

(2) प्रलेखों की जाँच/परख द्वारा।

(3) निरीक्षण द्वारा ।

(4) व्यक्तियों के सर्वे द्वारा ।

प्रलेख, दस्तावेज व ऐतिहासिक अभिलेख ही प्राथमिक समंकों के मुख्य स्रोत हैं। निरीक्षक परियोजना के आधार पर भौतिक गतिविधियाँ व प्रक्रिया, वातावरण व मानवीय व्यवहार को समझने हेतु एक उपयोगी तकनीक है।

पंचम चरण (Fifth step) — इस चरण में प्राय: तकनीकी व प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों का समाहार किया जाता है। इस रूप में विभिन्न तत्त्वों का गहराई से अध्ययन तथा परीक्षण हो जाता है। 

षष्ठ चरण (Sixth step ) — प्रतिवेदन छठे चरण में आँकड़ों का विश्लेषण कर परिणामों को प्राप्त किया जाता है। इस आधार पर वांछित निष्कर्षों की प्राप्ति व उनके आधार पर सुझावों या सिफारिशों की उत्पत्ति की जाती है। अच्छी संस्तुतियाँ सदैव अध्ययनकर्त्ताओं या पाठकों के स्वीकारने योग्य व अत्यधिक व्यावहारिक होती हैं ।

अन्तिम चरण (Last step) — अन्तिम चरण, प्रतिवेदन की सम्पूर्ण रूपरेखा की रचना होती है। यही प्रतिवेदन का एक मौलिक उद्देश्य होता है। अन्तिम रूपरेखा की रचना के पश्चात् प्रतिवेदक दृश्य/श्रव्य उपकरणों की सहायता से स्पष्ट / सरल रूप में महत्त्वपूर्ण सूचनाओं को सम्बोधित/सम्प्रेषित/प्रदर्शित प्रस्तुत किया जा सकता है।