Meaning of Public administration

Meaning of Public administration- (लोक प्रशासन का अर्थ)

‘लोक प्रशासन’ प्रशासन का लघु तथा विशिष्ट भाग है। लोक प्रशासन दो शब्दों से मिलकर बना है-लोक + प्रशासन। लोक का अर्थ है सार्वजनिक या समस्त जनता से सम्बन्धित तथा प्रशासन का अर्थ है प्रबन्ध या सेवा करना। इस प्रकार इसका शाब्दिक अर्थ है समस्त जनता से सम्बन्धित कार्यों का प्रबन्ध करना। प्रशासन शब्द अंग्रेजी भाषा के ‘Administration’ शब्द का हिन्दी रूपान्तर है। इस शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के दो शब्दों से मिलकर हुई है-ad (एड) = to और ministrare (मिनिस्ट्रेअर) give service, जिसका सम्मिलित अर्थ है ‘सेवा करना’ अथवा ‘प्रबन्ध करना। एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका के अनुसार, “प्रशासन शब्द का अर्थ है कार्यों का प्रबन्ध करना अथवा उनको पूरा करना।’

लोक प्रशासन की परिभाषाएँ (Definitions of Public Management)

लोक प्रशासन की परिभाषा विभिन्न विद्वानों ने भिन्न-भिन्न प्रकार से दी है, जैसे-

1. एच० डी० ह्वाइट के अनुसार— “लोक प्रशासन में उन सभी कार्यों का समावेश किया जाता है जिसका उद्देश्य लोक नीति को पूरा करना अथवा क्रियान्वित करना होता है जो उचित सत्ता द्वारा घोषित की गई हो।”

2. ई० एन० ग्लैडन के अनुसार—“लोक प्रशासन में लोक-पदाधिकारियों के समस्त कार्य सम्मिलित हैं जिनका सम्बन्ध प्रशासन से है, चाहे वह प्रशासक हो अथवा क्लर्क।”

3. वुडरो विल्सन के अनुसार-“लोक प्रशासन; विधि अथवा कानून को विस्तृत एवं क्रमबद्ध रूप में कार्यान्वित करने का नाम है। कानून को कार्यान्वित करने की प्रत्येक क्रिया एक प्रशासकीय क्रिया है।”
4. लूथर गुलिक के अनुसार-“लोक प्रशासन, प्रशासन के विज्ञान का वह भाग है जो शासन से सम्बन्धित है और इसीलिए उसका सम्बन्ध कार्यपालिका से है, जहाँ कि शासन का मुख्य कार्य सम्पादित होता है, यद्यपि उसको स्पष्ट रूप से उन प्रशासकीय समस्याओं पर भी ध्यान देना होता है जो व्यवस्थापिका और न्यायपालिका के क्षेत्र में आती हैं।” “

लोक प्रशासन की प्रकृति (nature of public administration)

प्रत्येक सामाजिक शास्त्र के समक्ष यह प्रश्न समान रूप से आता है कि वह विज्ञान है अथवा कला। लोक प्रशासन भी एक सामाजिक शास्त्र है जिसके समक्ष भी यह प्रश्न उत्पन्न होना स्वाभाविक है कि यह विज्ञान है या कला है अथवा दोनों। कुछ विद्वान् इसे विज्ञान मानते हैं। तो कुछ इसे विज्ञान स्वीकार नहीं करते हैं। अनेक विद्वानों के लिए यह विज्ञान कम है, कला अधिक है। जैकब वाइनर का कथन है, “सामाजिक विज्ञानों के विद्वान् शायद यह अच्छी प्रकार जानते हैं कि उनके विषय के तथ्य और अनुशासन इतने भ्रान्तियुक्त और अनिश्चित हैं कि उन्हें विज्ञान या वैज्ञानिक कहना हास्यास्पद होगा।’ सामाजिक शास्त्रों के साथ प्रमुख कठिनाई यही है कि इनके अध्ययन का विषय मानवों के सामाजिक सम्बन्धों से रहता है जिसके कारण इनमें निश्चित सिद्धान्त तथा नियमों का निर्माण असम्भव हो जाता है। लोक प्रशासन भी एक सामाजिक शास्त्र है जिसमें सरकार के संगठन, प्रशासन तथा सम्बन्धों का अध्ययन किया जाता है। लोक प्रशासन की प्रकृति के सम्बन्ध में विद्वानों के विभिन्न दृष्टिकोण तथा विचार हैं। डॉ० फाइनर एवं मॉरिस कोहन लोक प्रशासन को विज्ञान नहीं मानते हैं; उर्विक, टेलर तथा डॉ० ह्वाइट इस प्रश्न को भविष्य के लिए स्थगित कर देना चाहते हैं, परन्तु चार्ल्स ए० बेयर्ड, मर्सन, साइमन आदि विचारकों के लिए यह विज्ञान है। ऑर्डवे ट्वीड तथा ग्लैडन के लिए लोक शासन एक कला है। रुथना स्वामी जैसे लेखकों के लिए यह कला अधिक, विज्ञान कम है। वास्तव में लोक प्रशासन में विज्ञान तथा कला दोनों की ही विशेषताएँ पायी जाती हैं।

लोक प्रशासन का क्षेत्र (field of public administration)

लोक प्रशासन के क्षेत्र को हम निम्नलिखित रूपों में वर्णित कर सकते हैं-

(1) कार्यपालिका की क्रियाशीलता का अध्ययन-लोक प्रशासन कार्यपालिका के क्रियाशील तत्त्वों का अध्ययन करने वाले प्रशासन का महत्त्वपूर्ण माध्यम है। लोक प्रशासन का सम्बन्ध कार्यपालिका की उन समस्त क्रियाओं से है जिनके द्वारा वह राज्य के निश्चित लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास करता है। लोक प्रशासन का यह संकीर्ण स्वरूप है। प्रशासन का वास्तविक उत्तरदायित्व कार्यपालिका पर निर्भर करता है, चाहे वह राष्ट्रीय, राजकीय अथवा स्थानीय स्तर की ही क्यों न हो।

(2) सामान्य प्रशासन का अध्ययन-लक्ष्य निर्धारण, व्यवस्थापिका एवं प्रशासन सम्बन्धी नीतियाँ, सामान्य कार्यों का निर्देशन, स्थान तथा नियन्त्रण आदि लोक प्रशासन के क्षेत्र में सम्मिलित हैं।

(3) संगठन सम्बन्धी समस्याओं का अध्ययन-लोक प्रशासन में हम प्रशासनिक, संगठन का अध्ययन करते हैं। सरकार के विभागीय संगठन का अध्ययन इसके अन्तर्गत किया जाता है। लोक प्रशासन के क्षेत्र में नागरिक सेवाओं के विभिन्न सूत्रों, उसके संगठनों तथा क्षेत्रीय संगठनों का व्यापक अध्ययन करते हैं।

(4) पदाधिकारियों की समस्याओं का अध्ययन-लोक प्रशासन के क्षेत्र में पदाधिकारियों की भर्ती, प्रशिक्षण, सेवाओं की दशा, अनुशासन तथा कर्मचारी संघ आदि समस्याओं का व्यापक रूप से गहन अध्ययन किया जाता है।

(5) सामग्री प्रदाय सम्बन्धी समस्याओं का अध्ययन-लोक प्रशासन के अन्तर्गत क्रय, भण्डारण करना, वस्तु प्राप्त करने के साधन तथा कार्य करने के यन्त्र आदि का भी विस्तृत अध्ययन किया जाता है।

(6) वित्त सम्बन्धी समस्याओं का अध्ययन-लोक प्रशासन में बजट, वित्तीय प्रशासन तथा करारोपण आदि का अध्ययन किया जाता है।

(7) प्रशासकीय उत्तरदायित्व का अध्ययन–लोक प्रशासन की परिधि में हम सरकार के विभिन्न उत्तरदायित्वों का विवेचन करते हैं। न्यायालयों के प्रति उत्तरदायित्व, जनता तथा विधानमण्डल आदि के प्रति प्रशासन के उत्तरदायित्व का अध्ययन किया जाता है। (8) मानव-तत्त्व का अध्ययन-लोक प्रशासन एक मानव शास्त्र है। मानवीय तत्त्व के अभाव में वह अपूर्ण है। अमेरिकी लेखक साइमन तथा मर्सन ने लोक प्रशासन के अध्ययन में मानवीय तत्त्व के अध्ययन को विशेष महत्त्व दिया है।