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Bcom 2nd Year materials notes

Bcom 2nd Year materials notes

प्रश्न 1. बिन प्रपत्र पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।

Write a short note on Bin card 

एक स्टोर-कीपर (Store-keeper) का प्रमुख उद्देश्य व कर्त्तव्य सामग्री को ठीक-ठीक रखना,देख-भाल करना,टूट-फूट से तथा नष्ट होने से बचाना होता है । एक स्टोर-कीपर के प्रमुख कार्य, सामग्री प्राप्त होने पर उसकी प्रविष्टि ‘सामग्री प्राप्ति पुस्तक’ (Materials Receipt Book) में करके,प्रत्येक सामग्री के लिए निर्धारित अलमारी, ड्रम, डिब्बा या रैक में रखना और बिन कार्ड में उसकी प्रविष्टि करना होता है। प्रत्येक सामग्री के लिए एक अलग बिन कार्ड होता है जिसमें समय-समय पर प्राप्त सामग्री की तारीख,मात्रा तथा निर्गमित सामग्री का विवरण अर्थात् मात्रा,विभाग एवं तारीख और शेष सामग्री का विवरण दर्ज किया जाता है । जहाँ-जहाँ सामग्री रखी होती है,वहीं बिन कार्ड लटका दिया जाता है । बिन कार्ड का नमूना आगे दिया गया है 

Bcom 2nd Year materials notes

प्रश्न 2. सामग्री के निर्गमन का पहले आना पहले जाना पद्धति को स्पष्ट कीजिये।

Explain the method First in Frist out Method – FIFO

पहले आना पहले जाना पद्धति 

First in First Out Method– FIFO

जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है कि इस पद्धति के अन्तर्गत जो सामग्री स्टोर में पहले आती है,उसे ही उसके लागत मूल्य पर पहले निर्गमित किया जाता है अर्थात् जिस क्रम में स्टोर में सामग्री आती है उसे उसी क्रम में उनके लागत मूल्य पर निर्गमित किया जाता है। इस पद्धति में काल्पनिक रूप से यह मान लिया जाता है कि स्टोर में विभिन्न तिथियों में आने वाली सामग्रियों को. उनके आगमन के क्रम के अनुसार अलग-अलग रखा हुआ है। 

लाभ- (1) यह पद्धति सरल एवं व्यावहारिक है। (2) पुरानी सामग्री पहले निर्गमित की जाती है, अतः सामग्री के खराब होने या नष्ट होने का भय नहीं रहता। (3) अन्त में बची हुई सामग्री का मूल्य लगभग वर्तमान बाजार मूल्य के बराबर होता है।  Bcom 2nd Year materials notes

दोष-(1) विभिन्न तिथियों में क्रय की गई सामग्रियों को अलग-अलग मूल्यों के अनुसार संग्रह करना बड़ा कठिन कार्य है ।

(2) एक ही तिथि को अलग-अलग उपकार्यों के लिए निर्गमित सामग्री का मूल्य अलग-अलग हो सकता है ।

(3) पुराने मूल्यों पर निर्गमन किये जाने के कारण वस्तु की उत्पादन लागत बाजार मूल्य के बराबर नहीं होती। 

प्रश्न 3. ‘बाद में आना पहले जाना’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।

Write a short note on Last in First out Method -LIFO

बाद में आना पहले जाना पद्धति 

(Last in First out Method-LIFO)

इस पद्धति के अन्तर्गत जो सामग्री भण्डार-गृह में बाद में आती है, उसका निर्गमन पर किया जाता है तथा जो सामग्री पहले आती है उसका निर्गमन बाद में किया जाता है । इस पर के अन्तर्गत भी सामग्री को मल्यों के अनुसार अलग-अलग रखना होता है। इस पद्धति । काल्पनिक रूप से यह मान लिया जाता है कि भण्डार गृह में मात्र एक ही द्वार है । अत: बाद आने वाली सामग्री की पहले निकासी अधिक उचित एवं सुविधाजनक है।

गण (Advantages)-

(1) यह पद्धति सरल है तथा इसका प्रयोग सुगमता से किया जा सकता है ।

(2) सामग्री को अन्तिम लागत मूल्य पर निर्गमित किया जाता है तथा उत्पादित वस्त का उचित मूल्य निर्धारित हो सकता है। 

दोष (Disadvantages)-

(1) यह पद्धति व्यावहारिक नहीं है क्योंकि कोई भी उत्पादक स्टोर में पहले आये हुये माल को सड़ने के लिए नहीं छोड़ सकता । जो माल पहले आता है वह पहले ही निर्गमित किया जाता है तथा जो माल बाद में आता है वह बाद में ही निर्गमित किया जाता है ।

(2) शेष बची सामग्री का मूल्यांकन बाजार मूल्य से काफी भिन्न होता है क्योंकि सामग्री का स्कन्ध पहले आया हुआ बचता है ।

(3) अलग-अलग मूल्यों के अनुसार सामग्री रखने के लिए बहुत अधिक स्थान की आवश्यकता होती है। 

प्रश्न 4. स्कन्ध नियंत्रण की ABC पद्धति क्या है ? किन परिस्थितियों में इस पद्धति का प्रयोग किया जाता है ? इसके क्या लाभ हैं ? 

What is ABC system of inventory control ? Under what circumstances this method can be used ? What are its advantages ? 

स्कन्ध की अवपाद नियंत्रण पद्धति (Control by Exception Method of Inventory) 

ABC नियंत्रण को अवपाद नियंत्रण भी कहा जाता है। इस विश्लेषण से आशय विनियोजित पूँजी की मात्रा के आधार पर विभिन्न प्रकार की सामग्रियों की तुलनात्मक लागत ज्ञात करना तथा अधिक मूल्यवान सामग्री के नियंत्रण पर अधिक ध्यान देना एवं कम मूल्यवान सामग्री को अपवाद समझकर नियन्त्रण से बाहर रखना है। . आधुनिक युग में उत्पादन निर्माण में सामग्रियों की लागत में बहुत अन्तर पाया जाता है। अतः बड़ी-बड़ी संस्थाएं महँगी सामग्रियों पर अधिक ध्यान केन्द्रित करती हैं जबकि सस्ती. सामग्रियों पर नहीं। अतः एक ऐसी विश्लेषणात्मक तकनीक की आवश्यकता है जिसके द्वारा विभिन्न प्रकार की सामग्रियों को उनमें लगने वाली लागत के आधार पर बाँटकर चुनी हुई मूल्यवान सामग्री पर ही नियंत्रण की कड़ी व्यवस्था अपनाई जा सके। इस विश्लेषणात्मक तकनीक के आधीन नियंत्रण सामग्री का तुलनात्मक लागत के आधार पर अध्ययन किया जाता है। अत: अधिक मूल्यवान सामग्री कड़े नियंत्रण में रहती है 

सस्ती सामग्री की तुलना में महंगी सामग्री के प्रति प्रबन्धकों को अधिक सतर्क रहना चाहिये । अतः संग्रहागार में सामग्रियों पर उचित नियंत्रण करने के लिये उन्हें मूल्य के अनुसार ‘अ’ ‘ब’ ‘स’ तीन श्रेणियों में बाँट दिया जाता है। श्रेणी ‘अ’ में वे सामग्रियाँ शामिल की जाती हैं जो अधिक कीमती होती हैं और संग्रहागार में रखी गई सामग्रियों के कुल मूल्य का 70% से 75% तक होती हैं, यद्यपि उनकी संख्या या मात्रा 5% से 10% तक होती है । ‘ब’ श्रेणी में वे वस्तुयें शामिल की जाती हैं जो स्टोर में रखी गई सामग्रियों के मूल्य का 15% से 20% तक होती है लेकिन संख्या या मात्रा 20% से 25% तक होती है। ‘स’ श्रेणी में वे वस्तुयें रखी जाती हैं जो मूल्य की दृष्टि से स्टोर में रखी गई सामग्रियों का केवल 5% से 10% तक होती हैं, परन्तु मात्रा या संख्या में 70% से 75% तक होती हैं । सामग्रियों का इस प्रकार का विश्लेषण ABC विश्लेषण कहलाता है । नियंत्रण करते समय ‘अ’ श्रेणी की वस्तुओं पर सबसे अधिक नियंत्रण रखा जाता है, ब’ श्रेणी की वस्तुओं पर थोड़ा कम और ‘स’ श्रेणी की वस्तुओं पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। ‘अ’ श्रेणी की सामग्रियाँ पूर्ण सावधानी से रखी जानी चाहिये और मुख्य अधिकारी से अधिकृत होने पर ही निर्गमित होनी चाहिये । यह भी ध्यान रखना चाहिये कि ‘अ’ श्रेणी की वस्तुओं में अनावश्यक रूप से पूँजी न फंसी हुई हो 


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