bcom 2nd year memorandum of association

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पार्षद सीमा नियम एवं पार्षद अन्तर्नियम

(Memorandum of Association & Articles of Association) 

पार्षद सीमा नियम का अर्थ एवं परिभाषा 

Meaning and Definition of Memorandum of Association)

यह कमनी का वैधानिक एवं महत्वपूर्ण प्रलेख है जिसमें कम्पनी के उद्देश्य, कार्य क्षेत्र, अधिकारों व सीमाओं का उल्लेख होता है। इसे कम्पनी का संविधान या कम्पनी निर्माण की आधारशिला भी कहते हैं। यह कम्पनी का चार्टर होता है। प्रत्येक कम्पनी को इसे अनिवार्य रूप से तैयार तथा रजिस्ट्रार के पास फाइल करना पड़ता है। 

भारतीय कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 2 (56) के अनुसार–“पार्षद सीमानियम से आशय किसी कम्पनी के ऐसे पार्षद सीमानियम से है जो कि किसी पूर्व कम्पनी सन्नियम या वर्तमान अधिनियम के अनुसार मूलतः बनाया गया है या समय-समय पर परिवर्तित किया गया हो। 

न्यायधीश चार्ल्सवर्थ के अनुसार, “पार्षद सीमानियम कम्पनी का चार्टर (अधिकार पत्र) है जो उसके अधिकारों की सीमाओं को परिभाषित करता है।” 

पार्षद सीमा नियम की प्रमुख विषय सामग्री

(Main Contents of Memorandum of Association)

भारतीय कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 4 के अनुसार पार्षद सीमानियम में निम्नलिखित बातों का उल्लेख किया जाता है 

(1) नाम वाक्य (Name Clause)-इस वाक्य में कम्पनी का नाम होता है। नाम का चुनाव करते समय निम्न सावधानियां बरतनी चाहिए नाम केन्द्रीय सरकार की दृष्टि में अवांछनीय नहीं होना चाहिये। कोई भी कम्पनी बिना केन्द्रीय सरकार की अनुमति के अपने नाम के साथ क्राउन (Crown), इम्पीरियल (Imperial), शाही (Roral), चार्टर्ड (Chartered) आदि शब्दों का प्रयोग नहीं कर सकती । नाम किसी एता वर्तमान कम्पनी के नाम के समान या उससे मिलता-जुलता नहीं होना चाहिये जिसकी लिखना होता कम्पनी अधिनियम/28 पहले रजिस्ट्री हो चुकी है। प्रत्येक सार्वजनिक कम्पनी को अपने नाम के आगे ‘लिमिटेड निजी कम्पनी के नाम के आगे प्राइवेट लिमिटेड शब्दों का प्रयोग अनिवार्य रूप से का चाहिए। नाम कम्पनी के व्यवसाय की प्रकृति से सम्बन्धित होना चाहिए। 

(2) स्थान वाक्य अथवा रजिस्टर्ड कार्यालय वाक्य (Domicile Clane Registered Office Clause)-इस वाक्य में कम्पनी को उस राज्य का नाम लिखना है जिस राज्य में कम्पनी का रजिस्टर्ड कार्यालय स्थित है या स्थापित किया जायेगा। कार्यालय की स्थिति के आधार पर ही कम्पनी का न्याय क्षेत्र निर्धारित होता है । कम्पनी प्रधान कार्यालय में ही सदस्यों का रजिस्टर एवं अन्य समस्त रिकार्ड रखे जाते हैं। 

(3) उद्देश्य वाक्य (Object Clause)--इस वाक्य में कम्पनी के मुख्य उद्देश्य के अन्य उद्देश्यों का पूर्ण विवरण अलग-अलग होता है जिससे उसके कार्य क्षेत्र की सीमा नितिन होती है। कम्पनी के उद्देश्य वाक्य पर ही कम्पनी के सदस्यों की जोखिम तथा बाह्य व्यकि की सुरक्षा निर्भर करती है। 

कम्पनी (संशोधित) अधिनियम, 2013 के अनुसार, समामेलित कम्पनियों के उद्देश्यों को तीन भागों में बांटा जाना चाहिए- 

(i) मुख्य उद्देश्य इसमें कम्पनी के उन मुख्य उद्देश्यों और साफ उद्देश्यों जो मुख्य उद्देश्यों से निर्मित हो. शामिल किये जाते हैं। जिसके लिये कम्पनी की स्थापना की गई है।”

(ii) अन्य उद्देश्य इसमें उन उद्देश्यों को शामिल करते है जो कि मुख्य उद्देश्यों में तो शामिल नहीं है लेकिन कम्पनी उनकी प्राप्ति के लिये भविष्य में अपनी आवश्यकतानुसार काम शुरू करने की आशा करती हैं। 

(iii) गैर व्यापारिक कम्पनी का उद्देश्य वाक्य-गैर व्यापारिक कम्पनी के उद्देश्य वाक्य में उन राज्यों के नाम भी लिखने चाहिये जहाँ पर कम्पनी अपने उद्देश्य सम्बन्धी काम करना चाहती है। 

(4) दायित्व वाक्य (Liability Clause)--यह वाक्य कम्पनी के सदस्यों के दायित्व की सीमाओं का उल्लेख करता है। अंशों या गारण्टी द्वारा सीमित कम्पनियों के पार्षद सीमा नियम में यह उल्लेख होता है कि अंशधारियों का दायित्व सीमित है। अंशों द्वारा सीमित कम्पनी के सदस्यों का दायित्व उनके द्वारा क्रय किये गये अंशों के मूल्य या उनके अंशों पर अदत्त राशि तक ही सीमित होता है । गारण्टो द्वारा सीमित कम्पनी के सदस्यों का दायित्व उनके द्वारा दी गई गारण्टी की सीमा तक (केवल कम्पनी के समापन की दशा में ही) सीमित होता 

(5) पूँजी वाक्य(Capital Clause)—इस वाक्य में कम्पनी की पूँजी सम्बन्धी विवरण होता है। अंश पूजी वाली कम्पनी की दशा में पार्षद सीमानियम में यह भी लिखा होना चाहिये कि कम्पनी की अधिकृत पूँजी कितनी होगी तथा वह किस प्रकार के अंशों में कितनी-कितनी विभाजित होगी ? 

(6) संघ वाक्य या हस्ताक्षर वाक्य या सदस्यों का विवरण वाक्य-यह पार्षद सीमानियम का अन्तिम वाक्य होता है। इस वाक्य को घोषणा वाक्य भी कहते हैं क्योंकि इस वाक्य में पार्षद सीमानियम पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति यह घोषणा करते हैं कि वे एक कम्पनी के रूप में अपना संगठन बनाना चाहते हैं और अपने-अपने नाम के सामने उल्लिखित संख्या में अश लेना और उनका भुगतान करना स्वीकार करते हैं। इन व्यक्तियों के हस्ताक्षर साक्षी द्वारा पार्षद सीमा नियम एवं पार्षद अन्तर्नियम/ 299 प्रमाणित भी होने चाहिये। 

सार्वजनिक कम्पनी के सीमानियम पर कम से कम सात व्यक्तियों के तथा निजी कम्पनी के सीमानियम पर कम से कम दो व्यक्तियों के हस्ताक्षर होना आवश्यक हैं तथा प्रत्येक हस्ताक्षर कम से कम एक साक्षी द्वारा अवश्य प्रमाणित होना चाहिये।

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