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Bcom 3rd year Ratio Analysis

Bcom 3rd year Ratio Analysis

अनुपात विश्लेषण

अनुपात का अर्थ एवं परिभाषा-दो संख्याओं के पारस्परिक सम्बन्ध की गणितीय अभिव्यक्ति को अनुपात कहते हैं।

आर० एन० एन्थोनी के अनुसार, “अनुपात एक संख्या का दूसरी संख्या के सन्दर्भ में व्यक्त किया गया सम्बन्ध है।

अनुपातों की अभिव्यक्ति (Expression of Ratios)-1. शुद्ध अनुपात (Pure Ratio) के रूप में, 2. दर अथवा ‘इतने गुने’ (Rate or so many times) के रूप में, 3. प्रतिशत के रूप में।

अनुपात विश्लेषण का अर्थ एवं परिभाषा

Meaning and Definition of Ratio Analysis

अनुपात विश्लेषण का आशय वित्तीय विवरणों की मदों के बीच सम्बन्ध स्थापित करके व्यवसाय के वित्तीय विश्लेषण से होता है। इसके अन्तर्गत निर्दिष्ट उद्देश्य के अनुसार वित्तीय विवरणों की दो या अधिक मदों के बीच अनुपात ज्ञात करके एक निश्चित निष्कर्ष पर पहुँचा जाता है। वित्तीय आँकड़े स्वयं मूक होते हैं, अनुपात विश्लेषण से उनकी मूक भाषा का सही अर्थ हमारे समक्ष स्पष्ट हो जाता है।

प्रो० ओम प्रकाश के अनुसार, “अनुपात विश्लेषण स्थिर अथवा परिवर्तनशील प्रकृति की सम्बन्धित घटनाओं के बीच तार्किक सम्बन्ध की स्थापना है।’

अनुपात विश्लेषण में समाहित चरण-1. सम्बन्धित सूचनाओं का चयन, 2. वांछित अनुपातों का परिकलन,3. अनुपातों का तुलनात्मक अध्ययन एवं 4. अनुपातों का निर्वचन ।

अनुपात विश्लेषण का महत्त्व उद्देश्य या उपयोगिता-1. लेखांकन अंकों को स्पष्ट करने में सहायक, 2. वित्तीय विवरणों के विश्लेषण में सहायक, 3. व्यवसाय की कुशलता के मूल्यांकन में सहायक, 4. वित्तीय पूर्वानुमान एवं नियोजन में सहायक, 5. व्यवसाय की कमजोरियों का पता लगाने में सहायक, 6. तुलनात्मक अध्ययन में सहायक,7. तरलता स्थिति की जानकारी,8. शोधन क्षमता की जानकारी।

अनुपात विश्लेषण की सीमाएँ लेखांकन अनुपातों का प्रयोग करते समय उनमें अन्तर्निहित निम्नलिखित सीमाओं का ध्यान रखा जाना आवश्यक है-

1. एक अकेले अनुपात का सीमित महत्त्व किसी अनुपात का महत्त्व तभी अधिक स्पष्ट होता है जबकि उसका अध्ययन अन्य सम्बन्धित अनुपातों के साथ किया जाए। कैनेडी मैकमूलर के अनुसार, एक अकेला अनुपात अपने आप में अर्थहीन होता है, वह सम्पूर्ण चित्र प्रस्तुत नहीं करता है।”

  1. लेखांकन की स्वाभाविक सीमाओं का प्रभाव,3. गुणात्मक विश्लेषण का अभाव,4. ऊपरी दिखावट (Window Dressing) की सम्भावना,5. विश्लेषक की व्यक्तिगत योग्यता व पक्षपात का प्रभाव, 6. मूल्य स्तर में परिवर्तन की उपेक्षा, 7. अनुपातों की गणना में प्रयुक्त शब्दों की परिभाषाओं में एकरूपता का अभाव, 8. उचित प्रमापों का अभाव, 9. निरपेक्ष समंकों के अभाव में भ्रमपूर्ण परिणाम, 10. निर्वचन का साधन मात्र,11. ऐतिहासिक विश्लेषण,12. केवल सापेक्षिक स्थिति का प्रदर्शन, 13. मूल आँकड़ों की गलती का प्रभाव ।

अनुपाते के प्रयोग में सावधानियाँ-1. लेखांकन नियमों का पूर्ण ज्ञान,2. शीघ्र संवहन, 3. प्रस्तुतीकरण वे ही अनुपात प्रस्तुत किए जाने चाहिएं जिन पर विचार किया जाना है तथा उन्हीं व्यक्तियों के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं जिनका उनसे सम्बन्ध है, 4. अनुपातों की गणना करने से पूर्व लागत-लाभ विश्लेषण को ध्यान में रखना चाहिए अर्थात् अनुपातों के ज्ञात करने की लागत उनसे प्राप्त होने वाले लाभों से अधिक नहीं होनी चाहिए, 5. प्रमाप अनुपातों का निर्धारण कर लेना चाहिए, 6. अनुपातों का प्रयोग परिस्थितियों को ध्यान में रखकर करना चाहिए, 7. अनुपातें का विश्लेषण एवं निष्कर्ष निकालते समय मूल्य स्तर में हुए परिवर्तनों का आवश्यक समायोजन किया जाना चाहिए।

अनुपातों का वर्गीकरण

Classification of Ratios

अनुपातों का विश्लेषण विभिन्न व्यक्ति एवं संस्थाएँ अपने उद्देश्यानुसार करते हैं। प्रसिद्ध अनुपात विज्ञ स्पेन्सर ए० ट्रकर (Spencer A. Trucker) ने अपनी पुस्तक “Successful Managerial Control by Ratio Analysis” में 429 अनुपातों का वर्णन किया है। यहाँ पर इन सभी अनुपातों का वर्णन करना सम्भव नहीं है और न ही आवश्यक है। महत्त्वपूर्ण अनुपातों को निम्नलिखित आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है

(अ) संरचनात्मक वर्गीकरण या वित्तीय विवरणों के अनुसार वर्गीकरण (Structural Classification or Classification according to Financial Statements)-1. चिट्ठे से सम्बन्धित अनुपात (Balance Sheet Ratios), 2. लाभ-हानि खाता अनुपात/आय विवरण अनुपात या परिचालन अनुपात, 3. मिश्रित अनुपात (Composite or Mixed Ratios)।

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