Meaning of Feedback pdf – Bcom Notes

Meaning of Feedback pdf – Bcom Notes प्रतिपुष्टि का आशय  प्रतिपुष्टि एक प्रत्यार्पित सन्देश होता है, जो सन्देश प्राप्तकर्ता सम्प्रेषक को देता है। जब सम्प्रेषक सूचनाग्राही अथवा प्राप्तकर्ता को सन्देश भेजता है तो सम्प्रेषक उस भेजे गए सन्देश की प्रतिक्रिया चाहता है ।  सन्देश प्राप्त कर लेने के बाद सन्देश प्राप्तकर्ता द्वारा उस सन्देश को उचित प्रकार से समझा जाता है, तत्पश्चात् सन्देश पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की जाती है। इस प्रतिक्रिया का स्वरूप अनुकूल भी हो सकता है अथवा प्रतिकूल भी हो सकता है। यही प्रतिक्रिया प्रतिपुष्टि कहलाती है। प्रतिपुष्टि सन्देश प्रक्रिया का अन्तिम महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। प्रतिपुष्टि के अभाव में कोई भी सम्प्रेषण प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकती। प्रतिपुष्टि के आधार पर ही सम्प्रेषक द्वारा पूर्व सन्देश में परिवर्तन, सुधार अथवा संशोधन कर प्रभावी स्वरूप प्रदान किया जाता है। प्रतिपुष्टि प्रक्रिया (Feedback Process ) एक सन्देश प्राप्तकर्त्ता उचित प्रतिपुष्टि उसी स्थिति में कर सकता है जब वह सम्प्रेषक द्वारा भेजे गए सन्देश को ठीक से समझे अथवा सुने तथा उस सन्देश को उसी दृष्टिकोण से समझे, जिस दृष्टिकोण से सम्प्रेषक उसे समझाना चाहता है। जब सन्देश प्राप्तकर्त्ता सन्देश की कोई प्रतिक्रिया देता है, तभी सम्प्रेषण प्रक्रिया में प्रतिपुष्टि प्रक्रिया की उपस्थिति मानी जाएगी। प्रतिपुष्टि निम्नांकित चित्र द्वारा समझी जा सकती है – प्रतिपुष्टि प्रतिक्रिया में जब सम्प्रेषक सन्देश प्राप्तकर्ता को सन्देश भेजता है तो वह सन्देश मौखिक, लिखित, शाब्दिक अथवा अशाब्दिक हो सकता है। सम्प्रेषण प्रक्रिया में सम्प्रेषण के लिए वह बात जाननी आवश्यक है कि जब सम्प्रेषक सन्देश प्राप्तकर्त्ता को सन्देश भेजता है तो सन्देश प्राप्तकर्ता उस सन्देश के प्रति कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त करता है। लीलेण्ड ब्राउन के अनुसार, “सम्प्रेषण व प्राप्तकर्ता दोनों की प्रभावशीलता की एक वांछित मात्रा अत्यन्त आवश्यक होती है । ” प्रतिपुष्टि के प्रभाव (Effects of Feedback) प्रतिपुष्टि के प्रभाव निम्नलिखित हैं- (1) एक सम्प्रेषण प्रक्रिया के अन्तर्गत जिस प्रकार सम्प्रेषक की प्रत्येक क्रिया प्राप्तकर्त्ता की प्रतिक्रियाओं को प्रभावित करती है. ठीक उसी प्रकार प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रियाएँ भी सम्प्रेषक की क्रियाओं को प्रभावित करती हैं। (2)एक सम्प्रेषण प्रक्रिया के अन्तर्गत प्राप्तकर्ता सम्प्रेषक को अपने द्वारा व्यक्त प्रतिक्रिया के स्वरूप के आधार पर नियन्त्रित करने का प्रयत्न करता है।  (3) यदि सन्देश प्राप्तकर्त्ता द्वारा कोई प्रतिपुष्टि प्राप्त नहीं होती है तो पूर्व भेजे गए सन्देश को बदल देते हैं। एक सम्प्रेषण प्रक्रिया के अन्तर्गत प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रियाएँ ही प्रतिपुष्टि कहलाती हैं, जो सम्प्रेषक को उसके उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कुशलता प्रदान करती हैं। प्रतिपुष्टि की विधियाँ (Methods of Feedback) प्रतिपुष्टि की विभिन्न विधियाँ निम्नलिखित हैं- 1. लिखित सम्प्रेषण ( Written Communication) – इस विधि में पाठकों के चेहरे के भावों को समझना अथवा पढ़ना असम्भव होता है तथा शीघ्र ही कोई प्रतिक्रिया भी प्राप्त नहीं होती। लिखित सम्प्रेषण सबसे अच्छी विधि मानी जाती है क्योंकि इसमें सम्प्रेषक जो भी सन्देश भेजना चाहता है वह सरल तथा स्पष्ट होता है एवं उसमें किसी भी प्रकार का भ्रम नहीं होता। 2. आमने-सामने सम्प्रेषण (Face to Face Communication) … Read more

Outline of Business Letter : Introduction – bcom pdf Notes

Outline of Business Letter : Introduction -Bcom pdf Notes व्यावसायिक पत्र का खाका – परिचय किसी पत्र को लिखने से पहले एक प्रभावी योजना बनाना आवश्यक है। पत्र की प्रभावपूर्ण संरचना के लिए योजना में उद्देश्य की पहचान, श्रोताओं का विश्लेषण, मुख्य विचार को परिभाषित करना एवं विचारों के समर्थन में आँकड़े एकत्र करने चाहिए। जिस प्रकार भवन का निर्माण कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व एक नक्शा तैयार किया जाता है जो भवन के विभिन्न भागों के बारे में जानकारी देता है, उसी प्रकार व्यावसायिक पत्रों को लिखने से पहले इनका एक खाका तैयार किया जाता है जो इन पत्रों में दी जाने वाली विभिन्न सूचनाओं को विधिवत् रूप से व्यवस्थित करने में सहायक होता है। सामान्यत: खाके का आशय होता है कि ‘कहाँ क्या है?’ व्यावसायिक पत्र के विभिन्न भाग होते हैं; जैसे— भेजने वाले का नाम व पता, विषय, शीर्षक, विभिन्न वाक्य-खण्ड इत्यादि । व्यावसायिक पत्र के खाके में पत्र के इन सभी भागों को सम्मिलित किया जाता है तथा जब इन भागों को विधिवत् रूप से व्यवस्थित कर दिया जाता है तो यह एक आदर्श व्यावसायिक पत्र बन जाता है। व्यावसायिक पत्र, विक्रय प्रतिनिधि के कार्य को पूरा करता है अत: एक विक्रय प्रतिनिधि की भाँति व्यावसायिक पत्र को भी पाठक के मन पर सुप्रभाव डालना चाहिए। यदि कोई विक्रय प्रतिनिधि स्वयं को ठीक प्रकार से उपस्थित नहीं कर पाता है या फर्म के बारे में उसे पूर्ण जानकारी नहीं है तो उसका ग्राहक पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ेगा। यही स्थिति पत्र की होती है। यदि पत्र की भाषा प्रभावी नहीं है या पत्र की विषय-सामग्री को ठीक प्रकार से व्यवस्थित नहीं किया गया है या उसमें गलतियाँ हैं, तो पाठक उससे बिल्कुल प्रभावित नहीं होता। पत्र के ढाँचे को निर्धारित करते समय पूर्ण ध्यान रखना चाहिए कि उसमें कोई कमी न रह जाए, उसका कोई भाग छूट न जाए। पत्र का कोई भाग छूट जाने से पत्र की भी वही स्थिति होगी जो एक अपंग व्यक्ति की होती है। पत्र के प्रमुख भाग (Important parts of a Letter) पत्र के प्रमुख भाग निम्न प्रकार हैं– 1. पत्र का शीर्षक (Letter-head) किसी भी पत्र का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग उसका शीर्षक होता है, जिसमें पत्र भेजने वाली फर्म या संस्था का नाम, व्यवसाय की प्रकृति, व्यावसायिक कार्यालय का पता, दूरभाष सं० तार का पता आदि का विवरण होता है। अधिकतर यह शीर्षक छपा हुआ ही होता है। एक आकर्षक व सुन्दर शीर्षक पत्र प्राप्तकर्ता को पत्र पढ़ने के लिए प्रेरित करता है। सामान्यतः शीर्षक में निम्नलिखित सूचनाएँ होती हैं- (अ) फर्म का नाम व पता (Name and Address of the Firm) – सामान्यतः प्रत्येक व्यावसायिक गृह द्वारा पत्र व्यवहार में लैटर हैड का प्रयोग किया जाता है। यह एक समुचित आकार का कागज होता है, जिस पर फर्म का नाम, व्यवसाय की प्रकृति व इसका पता छपा होता है। इसके अतिरिक्त, इस पर फर्म की दूरभाष संख्या, … Read more

Meaning of Report pdf – Bcom Notes

Meaning of Report pdf – Bcom Notes प्रतिवेदन से आशय संचार माध्यमों में आए चहुँमुखी विकास के कारण आज देश-विदेश में कार्यक्रम आदि की तथ्यात्मक जानकारी पाने और भेजने के लिए ‘प्रतिवेदन’ का सहारा लिया जाता है। ‘प्रतिवेदन’ को अंग्रेजी में ‘रिपोर्ट’ या ‘रिपोर्टिंग’ कहते हैं। यह एक प्रकार का लिखित विवरण होता है, जिसमें किसी संस्था, सभा, दल, विभाग, सरकारी, गैर-सरकारी, सामान्य अथवा विशेष आयोजन की तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत की जाती है। इसका उद्देश्य सम्बन्धित व्यक्तियों को संस्था के कार्य, परिणाम, जाँच या प्रगति की सही-सही तथा पूरी जानकारी देना होता है। प्रतिवेदन के प्रकार (Kinds of Reports) प्रतिवेदन कई प्रकार के होते हैं। उदाहरण के लिए हम इन्हें निम्नलिखित श्रेणियों में रख सकते हैं- (1) सभा, गोष्ठी या सम्मेलन का प्रतिवेदन | (2) संस्था (सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक) आदि का मासिक अथवा वार्षिक प्रतिवेदन। (3) व्यावसायिक प्रगति या स्थिति का प्रतिवेदन | (4) जाँच समिति द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन | एक श्रेष्ठ प्रतिवेदन के गुण  (Characteristics of a Perfect Report) एक श्रेष्ठ प्रतिवेदन में निम्नलिखित गुण होते हैं— (1) प्रतिवेदन पूरी तरह से स्पष्ट और पूर्ण होना चाहिए।  (2) प्रतिवेदन की भाषा-शैली तथ्यात्मक होनी चाहिए। इसकी भाषा आलंकारिक और मुहावरेदार नहीं होनी चाहिए और न ही वाक्य अनेकार्थक शब्दों से युक्त होने चाहिए।  (3) इसकी भाषा निर्वैयक्तिक होनी चाहिए। प्रथम पुरुष ( मैं या हम) का प्रयोग नहीं होना चाहिए। उदाहरण- … Read more

Meaning of Business Letter pdf- Bcom Notes

Meaning of Business Letter pdf- Bcom Notes व्यावसायिक पत्र का आशय व्यावसायिक कार्यों के लिए किया जाने वाला पत्रों का आदान-प्रदान ‘ व्यावसायिक पत्र ‘व्यवहार’ कहलाता है और ऐसे पत्रों को ‘व्यावसायिक पत्र’ कहते हैं। आधुनिक युग में व्यावसायिक पत्र निश्चित रूप से एक अपरिहार्य आवश्यकता का रूप ग्रहण कर चुके हैं। किसी-न-किसी रूप में तथा कभी-न-कभी व्यावसायिक पत्रों के आदान-प्रदान की आवश्यकता प्रत्येक व्यवसायी तथा उद्यमी को पड़ती है। अपने नियमित कार्य को करने हेतु व्यवसायी को विभिन्न पक्षों से सूचनाओं का आदान-प्रदान करना पड़ता है। पूछताछ करने के लिए, आदेश प्रेषित करने के लिए, आदेशों को पूरा करने के लिए, साख की अनुमति एवं स्वीकृति प्राप्त करने के लिए, देनदारों को उनके खातों का विवरण भेजने के लिए, माल की पूर्ति में की गई कमी की शिकायत के लिए ग्राहकों की समस्याओं का समाधान करने के लिए तथा फर्म की ख्याति में वृद्धि करने के लिए प्रत्येक संस्था में सम्प्रेषण की आवश्यकता होती है। व्यावसायिक पत्रों के उचित माध्यम व सम्प्रेषण के द्वारा ही उद्योग जगत में फैले विशाल जनसमुदाय से सम्बन्ध स्थापित किया जाता है। भौगोलिक दूरी की प्राकृतिक बाधा को व्यावसायिक पत्रों के द्वारा सहजरूपेण ही पार कर लिया जाता है। व्यावसायिक पत्र का महत्त्व (Importance of a Business Letter) आधुनिक व्यापार की सफलता काफी सीमा तक व्यावसायिक पत्र-व्यवहार पर भी निर्भर करती है। हरबर्ट एन० केसन के अनुसार, “एक श्रेष्ठ पत्र उस मास्टर – चाबी के समान होता है जो ताला लगे दरवाजे को भी खोल देती है। यह बाजार का निर्माण करता है तथा वस्तुओं व सेवाओं के विक्रय हेतु मार्ग प्रशस्त करता है। ऐसा पत्र फर्म का चित्र प्रस्तुत करता है।” व्यावसायिक पत्र अपने श्रेष्ठ रूप में व्यवसाय में अन्तर्निहित उद्देश्य को प्राप्तकर्त्ता तक पहुँचाने में कारगर सिद्ध होता है। सुदूर क्षेत्रों में स्थित लोगों तक इस पत्र के द्वारा ही प्रतिष्ठान की ख्याति पहुँचती है। अच्छे व्यावसायिक पत्रों के द्वारा फर्म की ख्याति स्थायित्व को प्राप्त करती है। वास्तव में एक व्यावसायिक पत्र इतना प्रभावी होना चाहिए कि जिस सीमा तक सम्भव हो, लेखक का भी स्थान ले सके। व्यावसायिक पत्र लिखने के कारण / आवश्यकता (Reasons / Need to write a Business Letter) एल० गार्टसाइड ने व्यावसायिक पत्रों को लिखने के चार मुख्य कारण बताए हैं, जो निम्नलिखित हैं- (1) व्यक्तिगत सम्बन्ध के बिना सम्प्रेषण का सरल व आर्थिक साधन उपलब्ध कराना।  (2) सूचना प्रदान करना । (3) व्यवहारों के प्रमाण प्रदान करना ।’ (4) भविष्य के सन्दर्भ हेतु रिकॉर्ड प्रदान करना।  व्यावसायिक पत्र के लाभ/कार्य  (Advantages/Functions of a Business Letter) एक व्यावसायिक पत्र के लिखे जाने के अनेक दूरगामी लाभ (कार्य) होते हैं— … Read more

Meaning of Dunning Letter – Bcom Notes

Meaning of Dunning Letter – Bcom Notes तगादे के पत्र का अभिप्राय  यदि कोई व्यापारी या व्यक्ति नियत समय पर अथवा नियत अवधि के भीतर, खरीदी हुई वस्तु का मूल्य नहीं चुकाता है तो ऐसी स्थिति में उसको जो पत्र लिखा जाता है उसे ‘तगादे का पत्र’ अथवा ‘रुपया वसूली का पत्र’ कहते हैं। ऐसे पत्र बकाया राशि या अदत्त राशि वसूल करने के उद्देश्य से लिखे जाते हैं। ऐसे पत्रों को लिखते समय काफी सावधानी की आवश्यकता होती है, अत: तगादे के पत्र का लेखन पर्याप्त चातुर्य एवं सावधानी से होना चाहिए ताकि भुगतान भी प्राप्त हो जाए एवं ग्राहक भी बना रहे । सामान्यतः ऐसे व्यापारिक मामलों में पर्याप्त संयम रखा जाना चाहिए। इसमें शीघ्रता की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि अत्यधिक शीघ्रता करने पर न्यायिक विवाद की स्थिति उत्पन्न होने से श्रम एवं पैसे की हानि तो होती ही है, साथ ही व्यापारिक साख पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। तगादे सम्बन्धी पत्र लिखते समय ध्यान देने योग्य बातें  (Points to be kept in Mind while drafting a Dunning Letter) तगादे का पत्र लिखते समय लेखक का मूल ध्येय यह होना चाहिए कि अदत्त अथवा रुकी हुई राशि भी प्राप्त हो जाए एवं ग्राहक भी बना रहे, अत: इनका लेखन करते समय जिन महत्त्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखना आवश्यक होता हैं, वे निम्नलिखित हैं- (1) प्रत्येक दशा में भाषा-शैली पर नियन्त्रण होना आवश्यक है क्योंकि भुगतान से अधिक महत्त्वपूर्ण ग्राहक को बनाए रखना होता है। ( 2 ) प्रारम्भ में अदत्त राशि का विवरण, सम्बन्धित व्यापारी के पास भेजा जाना चाहिए तथा आशा की जानी चाहिए कि वह इस विवरण को प्राप्त करने के पश्चात् भुगतान कर देगा।  (3) यदि इसके बाद भी कोई उत्तर न आए तो व्यापारी को तगादे का प्रथम पत्र लिखना चाहिए। इस प्रथम पत्र की शैली सामान्य होनी चाहिए। (4) इसके बाद तगादे का दूसरा पत्र पुनः कुछ अन्तराल के बाद लिखा जाना चाहिए, जिसमें तगादे के प्रथम पत्र का भी उल्लेख करना चाहिए। इस पत्र में थोड़ी गम्भीर भाषा का प्रयोग किया जाना चाहिए । (5) यदि दूसरी या तीसरी बार भी सम्बन्धित व्यापारी ध्यान न दे तो तगादे का अन्तिम पत्र लिखा जाना चाहिए, जिसमें वैधानिक कार्यवाही की बात कही जानी चाहिए।  (6) ऐसे पत्रों को अण्डर पोस्टल सर्टीफिकेट (U.P.C.) अथवा रजिस्टर्ड डाक से भेजा जाना चाहिए।

What is Group Discussion ? – Bcom Notes

What is Group Discussion ? – Bcom Notes जब एक से अधिक व्यक्तियों की राय के अनुसार कोई निर्णय लेना होता है तब ऐसे सभी व्यक्तियों को आपस में बैठकर उस विषय पर वार्तालाप करना होता है। इस वार्तालाप को सामूहिक परिचर्चा का नाम दिया जा सकता है। विस्तृत अर्थ के रूप में सामूहिक परिचर्चा सामूहिक निर्णय लेने की ऐसी तकनीकी है जिससे अधिकांश अथवा सभी लोग उस निर्णय के पक्ष में हों। सामूहिक परिचर्चा व्यक्तियों के बीच विचारों के आदान-प्रदान और सम्प्रेषण शैली की एक परीक्षा है। इसके अन्तर्गत प्रतिभागियों के समूह को एक निश्चित समय अवधि के बीच परिचर्चा के लिए एक विषय दे दिया जाता है। प्रत्येक प्रतिभागी परिचर्चा के दौरान प्रस्तुति के आधार पर उसके सम्प्रेषण कौशल की जाँच की जाती है। असल में इस परिचर्चा के माध्यम से कोई व्यक्ति सामूहिक स्थिति में किस प्रकार दूसरों से विचार विनिमय कर पाता है इसी क्षमता को आँका जाता है। क्या होती है सामूहिक परिचर्चा (What is Group Discussion) प्रबन्धन संस्थानों तथा नौकरियों की तलाश कर रहे विद्यार्थियों की सम्प्रेषणशीलता या कम्यूनिकेटिव स्किल की जाँच करने के लिए सामूहिक परिचर्चा एक सशक्त माध्यम है। आज के प्रतियोगितात्मक एवं प्रतिस्पर्द्धात्मक युग में विभिन्न सहयोगियों के बीच सम्प्रेषणकला के महत्त्व को समझते हुए विभिन्न प्रबन्धन संस्थान तथा चयनकर्त्ता लिखित परीक्षा और व्यक्तिगत साक्षात्कार के अलावा सामूहिक परिचर्चा परीक्षण का सहारा लेकर योग्य आवेदनकर्त्ताओं का चयन करते हैं। प्राय: देखा जाता है कि प्रबन्धन संस्थान सम्पूर्ण चयन प्रक्रिया में सामूहिक परिचर्चा तथा व्यक्तिगत साक्षात्कार को लगभग पैंतीस प्रतिशत या इससे भी अधिक अंक का महत्त्व देते हैं। आजकल की प्रतियोगी परीक्षाओं में सामूहिक परिचर्चा का योगदान और भागीदारी बढ़ती ही जा रही है। सामूहिक निर्णय के लाभ (Advantages of Group Discussion ) सामूहिक निर्णय के लाभों का विवेचन निम्न प्रकार से किया जा सकता है – (1) समूह के पास एक व्यक्ति की अपेक्षा ज्ञान और सूचनाओं का विशाल भण्डार होता है। (2) समूह से विचारों की विविधता का लाभ मिलता है ।  (3) समूह हमेशा नवीन विचारों का पक्षधर होता है।  (4) सामूहिक निर्णय किसी भी समाधान की सहमति को बढ़ाते हैं।  (5) व्यक्तिगत निर्णय स्वैच्छिक होते हैं इसलिए सर्वग्राही नहीं हो सकते।  (6) सामूहिक निर्णयों में विशेषज्ञों की राय का लाभ मिलता है।  (7) सामूहिक निर्णय कर्मचारियों के हित में होते हैं जबकि व्यक्तिगत निर्णय सबके हितों को ध्यान में नहीं रखता है। (8) क्योंकि सामूहिक निर्णय सार्वजनिक निर्णयों को ध्यान में रखते हैं अतः प्रबन्ध एवं अधीनस्थों के मध्य सम्बन्ध मधुर बने रहते हैं। अतः सामूहिक निर्णय संगठन को शक्तिशाली बनाते हैं। सामूहिक निर्णयन के दोष (Disadvantages of Group Decision) सामूहिक निर्णयन में निम्न दोष विद्यमान हैं- (1) सामूहिक निर्णयन में समय अधिक लगता है। समूह के सभी व्यक्तियों की राय एवं विचारधाराएँ अलग-अलग होती हैं अतः एकाकी निर्णय लेने में समय अधिक लगता है।  (2)सामूहिक निर्णयन में समूह के सदस्यों पर उत्तरदायित्व को नियत करना कठिन होता है क्योंकि निर्णय किस व्यक्ति की विचारधारा के परिणाम हैं यह जानना एक कठिन कार्य है। (3) कभी-कभी सामूहिक निर्णय भी कुछ महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों की विचारधारा को प्रदर्शित करते हैं जिससे समूह में भिन्नता पैदा हो जाती है। (4) व्यक्तिगत निर्णयों की अपेक्षा सामूहिक निर्णय अक्सर असन्तुष्ट समझौते के परिणाम होते हैं। (5) कभी-कभी अनावश्यक परिचर्चा समूह के उद्देश्य को धूमिल कर देती है।  (6) … Read more