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bcom 2nd year income tax notes

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CHAPTER 1Agricultural income (residential Status & Tax Liability
CHAPTER 2Income from salary House Property
CHAPTER 3Deduction under income from business and profession
CHAPTER 4Capital gain
CHAPTER 5Clubbing of income
CHAPTER 6Tax planning
CHAPTER 7Tax authority
bcom 2nd year income tax notes

Agricultural income (residential Status & Tax Liability

 भारत में कृषि आय प्रारम्भ से ही आयकर से मुक्त रही है। इसका अर्थ यह है कि भारतीय संविधान में संसद को कृषि आय पर आयकर लगाने का अधिकार नहीं दिया है क्योंकि कृषि आय पर आयकर राज्य सरकारों द्वारा लगाया जा सकता है। कुछ राज्य सरकारों ने इस प्रकार की आय पर कर लगाए भी हैं। कर-निर्धारण वर्ष 1973-74 तक कृषि आय पूर्णतया कर-मुक्त थी, परन्तु कर-निर्धारण वर्ष 1974-75 से आयकर अधिनियम में एक महत्वपूर्ण संशोधन के अनुसार कृषि आय को करदाता की अन्य गैर-कृषि आयों पर लगने वाली कर की दरों को निर्धारित करने के लिए उसकी कुल आय में जोड़ा तो जाता है,लेकिन कृषि आय पर आयकर नहीं लगाया जाता।

कृषि आय के प्रकार

(Kinds of Agricultural Income)

आयकर अधिनियम की धारा 2 (1-A) के अनुसार, कृषि आय से आशय निम्नलिखित आयों से है

(1) ऐसी भूमि से प्राप्त कोई किराया या आय जो भारत में स्थित है और कृषि प्रयोजनों के लिए प्रयोग में लाई जाती है।

(2) भूमि से प्राप्त ऐसी आय जिसका प्रयोग कृषि उद्देश्यों के लिए किया जाता हो और निम्नलिखित से उत्पन्न ऐसी आय जो- .

(अ) कृषि क्रिया अर्थात् खेती करने से अथवा

(ब) किसी ऐसी क्रिया से जो कृषक द्वारा उगाई गई उपज अथवा किराया प्राप्तकर्ता द्वारा प्राप्त की गई उपज को बिक्री योग्य बनाने में उसके द्वारा आमतौर से की जाती हो; अथवा __(स) कृषक या वस्तु रूप में किराए से प्राप्तकर्ता द्वारा उगाई या प्राप्त की गई किसी ऐसी उपज के विक्रय से आय जिसके सम्बन्ध में उपर्युक्त (ब) में वर्णित प्रकार की क्रिया से भिन्न कोई क्रिया नहीं की गई हो।

(3) किसी ऐसी भूमि से किराया या ऐसे भवन (फार्म हाऊस) से प्राप्त आय जो कृषक या लगान प्राप्तकर्ता के स्वामित्व एवं अधिकार में है। परन्तु इस सम्बन्ध में निम्नलिखित शतें पूरी होनी आवश्यक है

(अ) यह मकान उस भूमि पर या उसके निकट स्थित हो और यह मकान कृषक अथवा लगान प्राप्तकर्ता के रहने के लिए अथवा भण्ड   न प्राप्तकत्ता क रहने के लिए अथवा भण्डार-गृह अथवा भूमि के सम्बन्ध में बाहरी मकान 

आयकर/2 (ब) उस भूमि पर भारत में लगान लगता हो अथवा कोई स्थानीय कर लगता हो,जो सरकार अधिकारियों द्वारा निर्धारित तथा वसूल किया जाता हो । यदि उस भूमि पर लगान अथवा स्थानी कर नहीं लगता है, यह भूमि शहरी सीमा (Urban limit) के अन्दर स्थित नहीं हो। निम्न सीमाओं को शहरी सीमा (Urban limit) कहा जाता है

(क) भूमि 10,000 या इससे अधिक की आबादी वाले नगरपालिका या छावनी बोर्ड की सीमाओं के अन्दर स्थित न हो; या

(ख) भूमि ऐसी क्षेत्र में स्थित न हो जिसकी इकाई दूरी (Aerial distance)

(I) ऐसी नगरपालिका या छावनी बोर्ड,जिसकी आबादी 10,000 से अधिक,किन्तु 1 लाख तक हो,की स्थानीय सीमाओं से 2 किलोमीटर तक हो,अथवा ___ (II) ऐसी नगरपालिका या छावनी बोर्ड,जिसकी आबादी 1,00,000 (एक लाख) से अधिक किन्तु 10,00,000 (दस लाख) तक हो, कि स्थानीय सीमाओं से 6 किलोमीटर तक हो; अथवा … (III) ऐसी नगरपालिका या छावनी बोर्ड, जिसकी आबादी 10 लाख से अधिक हो, की स्थानीय सीमाओं से 8 किलोमीटर तक हो । स्पष्टीकरण_1. उपर्युक्त सीमाओं में स्थित किसी भूमि के हस्तान्तरण पर होने वाला पूँजी लाभ कृषि आय नहीं होगा।

2. किन्तु किसी ऐसे कृषि भवन (Fram-house) जो कृषि भूमि से किराया अथवा आगम प्राप्त करने वाले कृषक के स्वामित्व में हैं, से आय जो ऐसे भवन को कृषि के अतिरिक्त किसी अन्य प्रयोग में प्रयुक्त करने से उदित या उत्पन्न हुई है कृषि आय नहीं मानी जायेगी। अतः यदि कोई व्यक्ति ऐसे भवन या भूमि को रिहायशी उद्देश्यों के लिए अथवा व्यापार या पेशे के उद्देश्य के लिए उप-किराये (Sub-let) पर उठा देता है, तो उससे प्राप्त आय कृषि आय नहीं मानी जायेगी। इस प्रकार की आय कर-योग्य होगी।

3. किसी नर्सरी पर पैदा किये गये बालवृक्ष (Sapling) अथवा पौध (Seeding) से – उत्पन्न आय कृषि आय मानी जाती है। ‘.. 4. यहाँ पर आबादी से तात्पर्य पूर्व की जनगणना के उन आँकड़ों से है जो गत वर्ष के प्रथम दिन से पूर्व प्रकाशित कर दिये गये हैं।

कृषि आय के लक्षण

(Characteristics of Agricultural Income)

 कृषि आय के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं

(1) ऐसी आय भूमि से प्राप्त होती हो जैसे कृषि आय में से वितरित किया गया लाभांश अंशधारियों के लिए कृषि आय नहीं है क्योंकि इस आय का प्रत्यक्ष सम्बन्ध भूमि से नहीं है।

(2) भूमि कृषि-कार्यों के लिए प्रयोग में लाई जाती हो-जैसे भूमि पर खेती की आधारभूत क्रियाएँ अवश्य की जानी चाहिए, तभी प्राप्त आय कृषि आय कहलाएगी।

(3) ऐसी कृषि भूमि भारत में ही स्थित हो-विदेश में स्थित कृषि भूमि से प्राप्त आय कृषि आय की श्रेणी में नहीं आती और इसलिए करदाता के लिए कर-मुक्त नहीं होती है।

गैर कृषि आय के कुछ उदाहरण (Some Examples of Non Agricultural Income) हालांकि निम्नलिखित आय देखने में कृषि आय जैसी लगती है, परन्तु कृषि आय नहीं मान जाती 

कृषि आय, गत वर्ष कर निर्धारण वर्ष,निवास स्थान एवं करदायित्व,करमुक्त आय/ 3 (4) मुर्गी पालन से आय। (5) ईट बनाने हेतु प्रयुक्त भूमि की आय। (6) कृषि आय में लगी कम्पनियों के अंशधारियों द्वारा प्राप्त लाभांश । (7) पत्थर की खानों से प्राप्त होने वाली आय । (8) मक्खन तथा पनीर की बिक्री से प्राप्त आय। (9) लाख की खेती करने से होने वाली आय। (10) डेयरी फार्म की आय। bcom 2nd year agriculture income notes

कृषि आय पर आय-कर की गणना

(Income Tax on Agricultural Income)

यदि करदाता की कुल आय’ आय-कर-मुक्त सीमा अर्थात् रु. 3,00,000,रु. 5,00,000 अथवा रु. 2,00,000 से अधिक हो तथा ‘शुद्ध कृषि आय’ रु. 5,000 से अधिक है तो कर की गणना निम्न प्रकार की जायेगी. (1) सर्वप्रथम, कुल आय’ में ‘शुद्ध कृषि आय’ को सम्मिलित करके आने वाली ‘आय के योग’ (Aggregation of income) पर करदाता पर लागू दरों के आधार पर आय-कर की गणना की जाती है। जैसे कि पिछले चरण में समझाया गया है।

(2) इसके बाद करदाता की कर-मुक्त सीमा अर्थात रु. 2,50,000,रु. 5,00,000 अथवा रु. 2,00,000 में ‘शुद्ध कृषि आय को जोड़ दिया जाता है। इस जोड़ की राशि पर पिछले चरण में समझाई गई विधि से करदाता पर लागू होने वाली दरों से यह मानकर आय-कर ज्ञात किया जाता है कि मानों यही करदाता की कुल आय है।

(3) ‘कुल आय’ (शुद्ध कृषि आय सहित) पर निकाले गये आय-कर में से ‘शुद्ध कृषि आय’ (न्यूनतम कर-योग्य सीमा सहित) पर ज्ञात आय-कर घटा दिया जाता है। अर्थात् [(i) में गर्णित आय-कर-(ii) में गर्णित आय-कर] शेष आय-कर ही करदाता का सकल आय-कर दायित्व है। सकल आय-कर दायित्व पर आय-कर का 2% शिक्षा उप-कर (Education cess) एवं 1% माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा उपकर लगाया जायेगा। शिक्षा उप-कर तथा माध्यमिक एवं उच्चशिक्षा उप-कर जोड़कर आने वाली राशि ही करदाता का शुद्ध कर दायित्व

होगा।

निवासीय-स्तर का निर्धारण

(Determination of Residential Status)

करदाता के निवास स्थान के आधार पर ही उसका कर-निर्धारण किया जा सकता है।

आयकर अधिनियम की धारा 6 में व्यक्ति, हिन्दू अविभाजित परिवार, कम्पनी, फर्म तथा अन्य व्यक्तियों के निवास स्थान को निर्धारित करने के सम्बन्ध में नियम दिए गए है।

एक व्यक्ति विशेष का निवासीय आधार

(Residential status of an Individual)

 एक व्यक्ति-विशेष का निवासीय आधार ज्ञात करते समय यह जानना अति आवश्यक है कि वह भारत में निवासी है या नहीं तथा इसका निर्धारण धारा 6(1) में दी गयी दो आधारभूत शर्तों के द्वारा किया जाता है

आधारभूत शर्ते (Basic.Conditions)-धारा 6(1) के अनुसार, (1) वह गत वर्ष में कुल मिलाकर 182 या इससे अधिक दिन के लिए भारत में रहा हो,

… अथवा (2) वह गत वर्ष से पूर्व के चार वर्षों में कुल मिलाकर 365 या अधिक दिन भारत में रहा हो और गत वर्ष में कम-से-कम 60 दिन (कुछ विशेष दशओं में 182 दिन) भारत में रहा हो।

अपवाद (Exceptions)-निम्न दशाओं में 60 के बजाय 182 दिन लिये जायेंगे

(1) कोई भारतीय नागरिक जो गत वर्ष के दौरान भारत के बाहर रोजगार के लिए या भारतीय जहाज के जहाजी बेड़े के सदस्य के रूप में भारत को छोड़कर जाते हैं।

(2) कोई भारतीय नागरिक या भारतीय मूल का निवासी जो गत वर्ष के दौरान भारत आया हो।

कोई व्यक्ति भारतीय मूल का व्यक्ति तभी कहलाता है यदि उसका जन्म या उसके माता-पिता या दादी-दादा में से किसी का जन्म अविभाजित भारत में हुआ हो।

अतिरिक्त शर्ते (Additional Conditions)-धारा 6 (6) (a) के अनुसार; .. (1) वह गत वर्ष से तुरन्त पूर्व के 10 वर्षों से कम-से-कमः वर्ष भारत में निवासी के रूप में रहा हो। . (2) वह गत वर्ष से तुरन्त पूर्व के 7 वर्षों में कुल मिलाकर 730 या अधिक दिन भारत

आयकर अधिनियम की धारा 6 (1) के अनुसार, एक व्यक्ति विशेष के निवासीय स्तर को निम्नलिखित तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है

(i) निवासी एवं साधारण निवासी (Resident & ordinary Resident)-यदि वह आधारभत शर्तों में से कम-से-कम एक शर्त तथा दोनों अतिरिक्त शर्तों को पूरा करता हो।

(ii) आसाधारण निवासी (Not-ordinary Resident)-यदि वह आधारभूत शतों में से कम-से-कम एक शर्त पूरी करता हो तथा दोनों या दोनों में से कोई एक अतिरिक्त शर्त पूरी न करता हो।

(ii) अनिवासी (Non-Resident)-एक व्यक्ति गत वर्ष में अनिवासी तव ही माना जाता है जबकि वह आधारभूत शर्तों की दोनों शर्तों में से एक भी शर्त को पूरा न करे। ऐसे व्यक्ति के लिए अतिरिक्त शर्तों पर विचार करने की आवश्यकता नहीं होती।

व्यक्ति के निवासीय-स्तर का निर्धारण (Determination of Residential Status of an Individual) के स्तर आधारभूत शर्तों की दो शर्ते अतिरिक्त शर्ते निवासी कम-से-कम एक शर्त पूरी हो । दोनों शर्ते पूरी हों। असाधारण निवासी कम-से-कम एक शर्त पूरी हो। | केवल एक शर्त पूरी हो या एक भी

शर्त पूरी न हो। bcom 2nd year agriculture income notes

अविभाजित हिन्दू परिवार का निवास स्थान

(Residence of a Hindu Undivided Family) .

 आयकर अधिनियम की धारा 6(2) के अनुसार, हिन्दू अविभाजित परिवार के निवासीय-स्तर को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है

(1) निवासी एवं साधारण निवासी (Resident and Ordinary Resident)-एक हिन्दू अविभाजित परिवार गत वर्ष में भारत में निवासी होगा, यदि उस गत वर्ष में उसके व्यवसाय का नियन्त्रण एवं प्रबन्ध पूर्णतया या आंशिक रूप से भारत में स्थित हो तथा उसके कर्ता द्वारा निम्नलिखित दोनों अतिरिक्त शर्ते भी पूरी की जाऐ

(i) उसका कर्ता गत वर्ष से तुरन्त पूर्व के 10 वर्षों में से कम-से-कम 2 वर्षों में भारत का निवासी रहा हो; तथा ..

.. (ii) उसका कर्ता गत वर्ष से तुरन्त पूर्व के 7 वर्षों में कुल मिलाकर कम-से-कम 730 ___ दिन तक भारत में रहा हो।

जिस स्थान पर वास्तव में व्यवसाय-संचालन की नीति निर्धारित की जाती है और नीति . सम्बन्धी निर्देश दिए जाते हैं, वही से उस व्यवसाय का नियन्त्रण एवं प्रबन्ध होना माना जाता bcom 2nd year agriculture income notes

  • असाधारण निवासी (Not-ordinary Resident)-एक हिन्दू अविभाजित __परिवार असाधारण निवासी होगा यदि उस गत वर्ष में उसके व्यवसाय का नियन्त्रण एवं प्रबन्ध

 पूर्णतया या आंशिक रूप से भारत में स्थित हो तथा उसका कर्ता अतिरिक्त शर्तों में से एक या दोनों शर्ते पूरी नहीं करता है। ___ (3) अनिवासी (Non-Resident)-एक हिन्दू अविभाजित परिवार अनिवासी होगा यदि उस गत वर्ष में उसके व्यवसाय का नियन्त्रण एवं प्रबन्ध पूर्णरूप से भारत के बाहर स्थित हो।

• फर्म तथा व्यक्तियों के अन्य समुदाय का निवास स्थान

(Residence of Firms and Other Association of Person) एक फर्म तथा व्यक्तियों का अन्य समुदाय केवल निवासी या अनिवासी ही हो सकता है अर्थात् असाधारण निवासी नहीं हो सकता। इसके निवासीय-स्तर का निर्धारण भी उनके व्यवसाय के नियन्त्रण एवं प्रबन्ध की स्थिति के आधार पर किया जाता है  (1) निवासी (Resident)-यदि गत वर्ष में उनके व्यवसाय का नियन्त्रण एवं प्रबन्ध पूर्णतया या आंशिक रूप से भारत में स्थित हो तो उनको निवासी माना जाएगा।  जिस स्थान पर वास्तव में व्यवसाय संचालन की नीति निर्धारित की जाती है और नीति सम्बन्धी निर्देश दिए जाते हैं, वही से उस व्यवसाय का नियन्त्रण तथा प्रबन्ध होना माना जाता

– (2) अनिवासी (Non-Resident)-यदि गत वर्ष में किसी फर्म या व्यक्तियों के अन्य समुदाय के व्यवसाय का नियन्त्रण एवं प्रबन्ध पूर्णरूप से भारत के बाहर स्थित है तो उनको अनिवासी माना जाएगा।

कम्पनियों का निवास स्थान

(Residence of Companies)

एक कम्पनी केवल निवासी या अनिवासी ही हो सकती है अर्थात् असाधारण निवासी नही हो सकती । इसके सम्बन्ध में निम्नलिखित नियम हैं

(1) निवासी (Resident)-एक कम्पनी भारत में निवासी कही जाएगी, यदि वह- . (i) एक भारतीय कम्पनी है, या (ii) गत वर्ष में उसका नियन्त्रण एवं प्रबन्ध पूर्णतया भारत में स्थित हो।

भारतीय कम्पनी से आशय उस कम्पनी से है जिसका रजिस्ट्रेशन भारत में लागू किसी अधिनियम के अन्तर्गत हुआ है।

(2) अनिवासी (Non-Resident)-यदि कोई कम्पनी निवासी की दोनों शर्तों में से किसी भी एक शर्त को पूरा नहीं करती तो वह ‘अनिवासी’ कहलाती है।

निवास-स्थान तथा कर-दायित्व

(Residence and Tax Liability) किसी भी करदाता का कर-दायित्व उसके निवास स्थान के आधार पर निश्चित किया जाता है। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 5 के अन्तर्गत इस सन्दर्भ में नियम दिए गए हैं जिसे हम निम्न चार्ट द्वारा सरलतापूर्वक समझ सकते हैं

निवासीच-स्तर के आधार पर कुल कर योग्य आय

कृषि आय, गत वर्ष कर निर्धारण वर्ष, निवास स्थान एवं करदायित्व, करमुक्त आय/7

निवासी असाधारण अनिवासी आय का विवरण एवं  निवासी साधारण

निवासी  गत वर्ष में भारत में प्राप्त होने वाली या प्राप्त हुई। कर-योग्य कर-योग्य | कर-योग्य |

समझी जाने वाली आय, चाहे वह भारत में| | उपार्जित या उदय हुई हो या नहीं। | गत वर्ष में भारत में उपार्जित या उदय हुई अथवा कर-योग्य कर-योग्य | कर-योग्य उपार्जित या उदय हुई समझी जाने वाली आय,

चाहे वह भारत में प्राप्त हुई हो या नहीं। 3. | गत वर्ष में भारत के बाहर उपार्जित तथा प्राप्त कर-योग्य | कर-योग्य | कर-योग्य | आय,जो भारत से नियन्त्रित व्यापार से या भारत में

| नहीं स्थापित पेशे से उत्पन्न हुई हो। 4. | गत वर्ष में भारत के बाहर उपार्जित एवं प्राप्त कर-योग्य कर-योग्य कर-योग्य | आय।

| नहीं । नहीं | भारत के बाहर गत वर्ष से पूर्व के वर्षों में प्राप्त या कर-योग्य कर-योग्य कर-योग्य | उपशीर्जत आय जो गत वर्ष में भारत में लाई गई हो, नहीं । – नहीं | नहीं | चाहे उस पर कर न लगा हो। कर-दायित्व सम्बन्धी उपर्युक्त चार्ट में प्रयुक्त शब्दों का संक्षिप्त विवेचन इस प्रकार है

भारत में प्राप्त आय (Income Received in India) प्राप्त आय से आशय प्रथम प्राप्ति (First Receipt) से है। यदि कोई धनराशि भारत से बाहर प्राप्त हुई है और उसे बाद में भारत लाया गया हो, तो उसे भारत में प्राप्त किया गया नहीं माना जाएगा। आय अर्जित होने के बाद सर्वप्रथम जहां प्राप्त होती है, वही उसका प्राप्ति स्थान माना जाता है। ___भारत में प्राप्त समझी जाने वाली आय (Income Deemed to be Received in India)-भारत में प्राप्त समझी जाने वाली आय से आशय ऐसी आय से है जिसकी वास्तव में प्राप्ति न होने पर भी प्राप्त हुई मान ली जाती है। उदाहरणार्थ__(i) कर्मचारी के प्रमाणित प्रॉविडेण्ट फण्ड (Recognised Provident Fund) में जमा होने वाली वार्षिक वृद्धि, जोकि 9.5% प्रतिवर्ष से अधिक है। .. (ii) प्रमाणित प्रॉविडेण्ट फण्ड (Recognised Provident Fund) में हस्तान्तरित की गयी राशि। . .. .

(iii) कम्पनी द्वारा घोषित अन्तिम लाभांश (Final Dividend declared by company) उस गत वर्ष में प्राप्त हुआ समझा जाता है जिस गत वर्ष में वह घोषित, वितरित – या चुकाया गया है।

(iv) कम्पनी द्वारा घोषित अन्तरिम लाभांश (Interim Dividend Declared by – Company)-उसी गत वर्ष का प्राप्त हुआ माना जाएगा जिस वर्ष कम्पनी द्वारा ऐसा लाभांश

बिना किसी शर्त के अंशधारियों को उपलब्ध करा दिया गया हो ।

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Income from salary House Property

मकान-सम्पत्ति से आय का निर्धारण वार्षिक मूल्य के आधार पर किया जाता है । वार्षिक मूल्य से आशय यह है कि मकान कितने उचित किराये पर सामान्यतया प्रतिवर्ष उठाया जा सकता है । अतः सम्पत्ति का वार्षिक मूल्य निकालने की विधि को ठीक-ठीक समझना आवश्यक – सामान्यतया वार्षिक मूल्य निम्न घटकों के आधार पर ज्ञात किया जाता है: महंगाई भत्ता तथा मंहगाई वेतन-मूल्यों में वृद्धि के कारण यह भत्ता मिलता है तथा इसकी सम्पूर्ण राशि कर योग्य होती है। कभी यह भत्ता सेवा की शर्तों के अन्तर्गत दिया जाता है और कभी बिना सेवा की शर्तों के अन्तर्गत । यदि यह सेवा की शर्तों के अन्तर्गत दिया जाता है

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Deduction under income from business and profession

ह्रास व्यक्तिगत सम्पत्ति पर स्वीकार नहीं किया जाता बल्कि सम्पत्तियों के ब्लॉक पर स्वीकार किया जाता है । करदाता के व्यापार में प्रयुक्त विभिन्न दृश्य एवं अदृश्य सम्पत्तियों को विभिन्न ब्लॉकों में विभाजित कर दिया गया है । प्रत्येक ब्लॉक की समस्त सम्पत्तियों पर एक ही साथ तथा एक ही दर से ह्रास स्वीकार किया जाता है । धारा 2 (11) के अनुसार, “सम्पत्तियों के ब्लॉक का अर्थ एक ही वर्ग की सम्पत्तियों के ऐसे समूह (Block) से हैं 

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Capital gain

सम्पत्ति की लागत से अधिक है तो ऐसा आधिक्य पूँजी लाभ शीर्षक में कर योग्य होगा। इन नये मकानों की प्राप्ति की लागत निम्न होगी क्रय मूल्य अथवा नये मकान की निर्माण लागत-कर मुक्त पूंजी लाभ . मकान सम्पत्ति का 3 वर्ष में हस्तान्तरण-यदि नया मकान क्रय अथवा निर्माण की तिथि के 3 वर्ष के अन्दर हस्तान्तरित कर दिया जाता है तो ऐसे हस्तान्तरण पर होने वाला पूंजी लाभ+ पूर्व में कर- मुक्त पूँजी लाभ उस गत वर्ष की कर योग्य आय में जोड़ा जायेगा जिस वर्ष इस नये मकान को हस्तान्तरित किया गया है।

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Clubbing of income

कोई ऐसा व्यवहार, जिसका प्रभाव किसी अचल सम्पत्ति का हस्तान्तरण अथवा उसका प्रयोग करना सम्पन्न हो। _ पूँजी लाभों पर उस वर्ष का निर्धारण किया जाता है, जिस वर्ष पूँजी सम्पत्ति का हस्तान्तरण हुआ है, भले ही उसकी क्षतिपूर्ति का निर्धारण बाद में हो । न्यायालय के आदेश से कमिश्नर या रिसीवर द्वारा किया गया विक्रय भी हस्तान्तरण माना जाता है । एक नई कम्पनी द्वारा एक चालू फर्म को क्रय कर लेना भी हस्तान्तरण माना गया है।

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Tax planning

 कर नियोजन से आशय किसी भी व्यक्ति द्वारा करारोपण के विद्यान का पूर्व व गहन अध्ययन करके उसके द्वारा प्रदान की गई छूटों,रियायतों,कटौतियों आदि का पूर्ण लाभ उठाकर अपने कर भार को कम से कम करना है। कर नियोजन के द्वारा व्यक्ति विधान के नियमों का उल्लघंन किए बिना अनुकूल रियायतों छूटों तथा कटोतियों के माध्यम से कर-भार में कमी करता है। प्रो० डाल्टन के अनुसार, “कर नियोजन सरकार की नीतियों के अनुरूप ईमानदारी से कार्य करते हुए कर छूटों एवं कर प्रेरणाओं का लाभ उठाते हुए कर-दायित्व को न्यूनतम करने का एक वैज्ञानिक तरीका है।” 

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Tax authority

विवरण दाखिल करने की अवधि (Period for filing the return)-धारा 139 (1) के अनुसार, प्रत्येक कम्पनी अथवा अन्य कोई भी व्यक्ति, जिसकी कुल आय अथवा उस व्यक्ति की कुल आय, जिनकी आय पर वह आय-कर देने को दायी है, अधिकतम कर-मुक्त सीमा से अधिक है, अपनी तथा उस व्यक्ति की गत वर्ष की आय का विवरण निर्धारित फार्म में तथा निर्धारित ढंग से प्रमाणित करके आय-कर कार्यालय से देय तिथि को या इससे पूर्व के अन्तर्गतं अवश्य प्रस्तुत करेगा


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